दैनिक वेतन भोगियों के नियमितीकरण मामले में सरकार क्यों चुप है – सुरेन्द्र वर्मा

रायपुर। दैनिक वेतनभोगी और अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर सवाल उठाते हुए प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेन्द्र वर्मा ने कहा है कि 100 दिन के भीतर नियमितीकरण का वादा था, ढाई साल बीत जाने के बावजूद भी छत्तीसगढ़ के दैनिक वेतन भोगी और अनियमित कर्मचारी ठगे जा रहे हैं। माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर में सुनवाई के दौरान स्पष्ट तौर पर कहा कि सरकारी संवैधानिक नियोक्ता है और गरीब कर्मचारियों के दम पर अपना बजट संतुलित नहीं कर सकती। जो लोग बुनियादी और महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवाओं को संभाल रहे हैं उनके हित में सहानुभूति पूर्वक विचार कर चार महीने के भीतर निर्णय लेने के कठोर निर्देश जारी किया गया है। भाजपा सरकार की नीयत नहीं है कि अनियमित कर्मचारियों को नियमित किया जाए और इसीलिए आउटसोर्सिंग के जरिए काम लेकर नियमित नियुक्तियों से बचने का कुत्सित प्रयास भाजपा की सरकार हर विभाग में कर रही है।

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेन्द्र वर्मा ने कहा है कि भाजपा की सरकार ने कर्मचारियों के हर वर्ग को ठगा है। पूर्ववर्ती कांग्रेस की सरकार ने पुरानी पेंशन योजना पुनः लागू किया नई पेंशन योजना के तहत कर्मचारियों के हक का काटा गया पैसा लगभग 30 हजार करोड़ रूपया केंद्र की एजेंसी ने वापस नहीं लौटाया, डीए के एरियर्स के लिए प्रदेश के 5 लाख सरकारी कर्मचारी लगातार आंदोलित है। रसोईया बहनें, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सफाई कर्मचारी, कोटवार संघ, पंचायत सचिव, पटवारी, विद्या मितान, अतिथि शिक्षक, प्लेसमेंट आउटसोर्सिंग कर्मचारी इस सरकार में शोषण के शिकार हैं।

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेन्द्र वर्मा ने कहा है कि भाजपा की सरकार छत्तीसगढ़ के नियमित कर्मचारियों के साथ वादा खिलाफी पर उतर आयी है। 47000 स्कूल सफाई कर्मचारी, 13,000 रसोइए, डीएड बीएड अभ्यर्थी सड़क पर हैं, बिजली विभाग के 12 हजार से अधिक कर्मचारी कई वर्षों से सेवा दे रहे हैं, लेकिन वादा करके भी उन्हें नियमित नहीं कर रही है सरकार। समान कार्य के बावजूद कर्मचारियों का आर्थिक और मानसिक शोषण किया जा रहा है। एस्मा का डर दिखाकर उनकी आवाज़ दबाई जा रही है। भारतीय जनता पार्टी की सरकार बहानेबाजी छोड़कर विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए मोदी की गारंटी के वायदे पर तत्काल अमल करें और आउटसोर्सिंग बंद कर नियमितीकरण करे।

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