आईपीएल विशुद्ध रूप से मुनाफा कमाने का आयोजन, इसको राज्य सरकार मुफ्त सुविधाये क्यों दे रही है – शुक्ला

रायपुर। आईपीएल विशुद्ध रूप से व्यावसायिक आयोजन है, पैसा कमाना इस कार्यक्रम का उद्देश्य है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि इस कार्यक्रम के जरिये लाखों रुपये राजस्व बीसीसीआई कमा रहा है। उसको छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा मुफ्त में सुविधा उपलब्ध कराना आपत्तिजनक है। यह जनता के धन की बर्बादी है, कांग्रेस पार्टी इसकी कड़ी निंदा करती है। करोड़ो रूपये खर्चा करके कांग्रेस की पहली सरकार ने शहीद वीरनारायण सिंह स्टेडियम बनाया था। भारतीय जनता पार्टी की सरकार इसको सुरक्षित नहीं रख पाई और बीसीसीआई को सौंप दी। बीसीसीआई को सौंपे तो ठीक करें, उसके बदले में बीसीसीआई से राज्य के लोगो के लिये और राज्य के खिलाड़ियो के लिये क्या सहुलियत दी है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिये। आईपीएल में जितनी भी सुविधाये दी जा रही है, बिजली की सुविधा दी जा रही, पानी की सप्लाई दी जा रही है, वहां पे पुलिस र्फोस लगाये गये है, सुरक्षाकर्मी लगाये गये है, सफाई कर्मी लगाये गये है। प्रशासन के लोगो की ड्यूटी है, सरकारी अधिकारी व्यवस्था देख रहे है। बदले में छत्तीसगढ़ की जनता को क्या फायदा हो रहा है? सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिये?

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि आईपीएल एक पैसा कमाना वाली संस्था है, आईपीएल का उद्देश्य है टिकट बेचकर पैसा कमाना। वैसी स्थिति में राज्य में मैच हो रहा है तो राज्य की जनता का भी उस मैच का अधिकार होता है। आरसीबी का होम ग्राउंड बेंगलुरू था, वहां पे कर्नाटका सरकार ने इनको सुविधा उपलब्ध नहीं करायी। कर्नाटका क्रिकेट एशोसियेशन ने कहा कि हमारे लोगो के लिये 10 हजार टिकट उपलब्ध कराईये और आरसीबी छत्तीसगढ़ को अपना होम ग्राउंड बना लिया। इससे राज्य को क्या फायदा हुआ। रायल चैलेंजर बैंगलुरू का नाम बदलकर रायल चैलेंजर छत्तीसगढ़ कर दिया जाये। आईपीएल को जितनी भी सुविधा दी जा रही है, उसके बदले सरकार को पूरा टैक्स वसूली करना चाहिये।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि आईपीएल मैच को लक्जरी मनोरंजन की श्रेणी में रखा गया है। 40 प्रतिशत जीएसटी के दायरे में है ऐसे में सरकार द्वारा बिजली, पानी, सफाई, सुरक्षा खर्च में रियायत का लाभ देना सरकार की मंशा पर सवाल उठाता है, पिछले दरवाजे से कीमत वसूल कर सत्ता में बैठे लोग अनुचित सुविधाएं देकर जनता के धन, सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग कर रहे हैं। भारतीय खिलाड़ियों की आईपीएल सैलरी से 10 प्रतिशत ज्क्ै काटा जाता है, जबकि विदेशी खिलाड़ियों पर 20 प्रतिशत का फ्लैट ज्क्ै लगता है। 56 वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद, 22 सितंबर 2025 से आईपीएल टिकटों पर 28 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत जीएसटी कर दिया गया है। यह उच्चतम टैक्स ब्रैकेट है, जो कैसीनो और जुए के समान है, क्योंकि इसे ष्सके अलावा, खिलाड़ियों को अपनी सालाना आय पर 30 प्रतिशत या उससे अधिक का आयकर भी देना पड़ता है। अतः इसको राज्य सरकार द्वारा मुफ्त सुविधा दिया जाना अनुचित और गलत है।

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