रायपुर। छत्तीसगढ़ में दवा दुकानों की जांच के लिए खाद्य और औषधि विभाग के साथ पुलिस और राजस्व अमला भेजने के सरकारी आदेश पर सवाल उठाते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि सरकार ने आदेश निकाला है कि अब मेडिकल स्टोरों की जाँच खाद और औषधि विभाग के इंस्पेक्टर के साथ पुलिस और राजस्व अमला भी करेगा। मेडिकल स्टोर में जांच के लिए पुलिस लेकर एसडीएम, तहसीलदार भी जा रहे है। सरकार के पास ऐसा क्या इनपुट मिला है जो यह कार्यवाही की जा रही यह तो आपात स्थिति में होता है कि पुलिस जांच के लिए जाए। यह निर्णय गलत है सरकार को अपने औषधि विभाग के लोगों पर भरोसा नहीं। पुलिस और राजस्व क्यों जाँच करेगा? कहीं गड़बड़ी है तो पुलिस स्वमेव जाँच कर सकती है लेकिन हर रोज पुलिस दुकान की जाँच करने पहुंचेगी तो इससे दुकानदार की परेशानी बढ़ेगी। राज्य में नकली दवा तो सरकारी अस्पतालो और मेडिकल सप्लाई कारपोरेश के पास पकड़ा रही जांच निजी मेडिकल का करेंगे। कांग्रेस, सरकार के निर्णय का विरोध करती है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि भाजपा की सरकार में प्रशासनिक आतंक चरम पर है, व्यवसायी पहले से ही जीएसटी की दुर्भावना पूर्वक कार्यवाहियों से दहशत में हैं, अब दवा दुकानों में पुलिस की आमद से स्थिति और ज्यादा बिगड़ गई है। भाजपा सरकार ने अपने भ्रष्टाचार और अक्षमता को छुपाने के लिए इस तरह का तुगलकी फरमान जारी किया है। नकली और अमानक दवाओं के सप्लायरों को इस सरकार का संरक्षण है, छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड ही छत्तीसगढ़ में अमानक गुणवत्ताहीन दवाओं की सप्लाई का सरगना है और जांच के नाम पर पुलिसिया कार्रवाई छोटे-छोटे दवा दुकानों पर किए जा रहे हैं।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि भाजपा सरकार व्यवसायियों का भयादोहन कर रही है। राजधानी रायपुर से लेकर बस्तर, दंतेवाड़ा तक छोटे-छोटे दुकानदारों को डराया जा रहा है, खाद्य और औषधि विभाग का तो दायित्व है जांच का, लेकिन पुलिसिया कार्रवाई इस सरकार के इंस्पेक्टर राज कायम कर वसूली गिरोह चलाने का कुत्सित प्रयास है। तमाम गड़बड़ियां तो सरकारी सप्लाई में है। CGMS के माध्यम से सरकारी अस्पतालों में अमानक पैरासिटामोल बांटे गए, गुणवत्ताहीन सिरप की बोतलें, कैल्शियम विटामिन डी 3, ओफ्लोक्सासिन, ओरिडोजोल सहित कई दवाएं अमानक निकली, बेहद स्पष्ट है कि यह सरकार मोटे कमीशन और भ्रष्टाचार की काली कमाई में हिस्सेदारी के लिए दवाओं की गुणवत्ता से समझौता कर रही है और इसी से ध्यान भटकाने के लिए छोटे-छोटे दुकानदारों पर दिखावे की कार्यवाही कर रही है।