15वें वित्त की ऑडिट क्लीयर कराने के नाम पर कमीशन मांगने का आरोप

०  जनपद बकावंड की पंचायतों पर दबाव 
०  सरपंच-सचिवों ने लगाए संयुक्त संचालक और उप संचालक पर आरोप 
०  बस्तर कलेक्टर से लगाई जांच कराने की गुहार
बकावंड। जनपद पंचायत बकावंड की ग्राम पंचायतों में 15वें वित्त आयोग की ऑडिट को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। पंचायत जनप्रतिनिधियों ने पंचायत एवं समाज सेवा विभाग के संयुक्त संचालक और उप संचालक पर ऑडिट क्लीयरेंस के एवज में 1 प्रतिशत राशि की मांग करने का आरोप लगाया है।
सरपंच-सचिवों के अनुसार 15वें वित्त की ऑडिट प्रक्रिया में ऑनलाइन पासबुक और रोकड़ बही का मिलान किया जाता है। दस्तावेज पूर्ण होने के बाद भी ऑडिट रिपोर्ट पर हस्ताक्षर के लिए राशि मांगी जा रही है।आरोप है कि जगदलपुर जिला मुख्यालय से फोन के माध्यम से पंचायतों पर दबाव बनाया जा रहा है।संरपंचों और सचिवों ने बताया कि भुगतान न करने पर तीन तरह से दबाव बनाया जाता है। इसके तहत
ऑडिट फाइल रोक दी जाती है तकनीकी आपत्ति लगाकर फाइल वापस कर दी जाती है और उप संचालक स्तर से फोन कर जल्द निपटारे का दबाव बनाया जाता है। नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर एक सरपंच ने कहा कि 15वें वित्त में राशि पहले से सीमित है। यदि उसमें से भी 1 प्रतिशत हिस्सा देना पड़े तो गांव के विकास कार्य प्रभावित होंगे। ऑडिट एक संवैधानिक प्रक्रिया है, उसे पारदर्शी होना चाहिए।सरपंचों और सचिवों ने कलेक्टर बस्तर से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। साथ ही ऑडिट प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराने और शिकायत निवारण के लिए हेल्पलाइन शुरू करने का सुझाव दिया है। 15वें वित्त आयोग का उद्देश्य पंचायतों को बुनियादी सुविधाओं के लिए सीधे राशि उपलब्ध कराना है। ऑडिट का मकसद खर्च में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। वहीं इस संबंध में जब बकावंड जनपद के सीईओ से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि उनके पास ऎसी कोई जानकारी या शिकायत नहीं आई है। दूसरी बात यह कि संयुक्त संचालक जगदलपुर में नहीं बैठते हैं।

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