
0कागजों पर ही रौशन हो रहा है अस्पताल, अंधेरे के साये में रहते हैं मरीज
0 सोलर प्लांट की मरम्मत पर खर्च कर दिए 7.41 लाख, फिर भी अंधेरा
(अर्जुन झा) बकावंड। सरकारी धन का कैसे दुरूपयोग या कहें निजी हित में उपयोग किया जाता है, इसकी बानगी देखनी हो, तो चले आईए बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड मुख्यालय में। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बकावंड में सरकारी धन के दुरुपयोग और प्रशासनिक लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां सोलर प्लांट की मरम्मत के नाम पर 7.41 लाख रुपए की बड़ी राशि तो खर्च कर दी गई, लेकिन अस्पताल की स्थिति जस की तस बनी हुई है। आलम यह है कि सरकारी फाइलों में काम पूरा दिखाकर भुगतान भी कर दिया गया है, जबकि जमीन पर आज भी मरीज और डॉक्टर अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। जिला खनिज निधि न्यास मद से जारी हुए थे 7.41 लाख रुपए और क्रेडा पर सवाल उठ रहे हैं।जानकारी के अनुसार सीएचसी बकावंड में पहले से स्थापित सोलर प्लांट लंबे समय से बंद पड़ा था। इसके जीर्णोद्धार और मरम्मत के लिए जिला खनिज संस्थान न्यास मद 2025-26 से 7.41 लाख रुपए स्वीकृत किए गए थे। इस कार्य की जिम्मेदारी सौर ऊर्जा के क्षेत्र में काम करने वाली एजेंसी क्रेडा जगदलपुर को सौंपी गई थी। दस्तावेजों की मानें तो मरम्मत कार्य के नाम पर राशि जारी की जा चुकी है, लेकिन मौके पर रत्ती भर भी काम नहीं हुआ है। अस्पताल प्रशासन की बेबसी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बिजली कटौती होते ही पूरे अस्पताल परिसर में अंधेरा छा जाता है। महत्वपूर्ण विभाग जैसे लेबर रूम, वैकसिन्स रखने की जगह कोल्ड चेन और इमरजेंसी वार्ड में बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए आज भी पुराने डीजल जनरेटर का सहारा लेना पड़ रहा है। सोलर प्लांट की मरम्मत सिर्फ फाइलों तक सिमट कर रह गई है।
सवालों के घेरे में काम की गुणवत्ता
जब मरम्मत का काम हुआ ही नहीं, तो राशि का भुगतान किसे और क्यों किया गया? यह सवाल अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों और मरीजों का आरोप है कि यह सीधे तौर पर सरकारी बजट का दुरुपयोग है।लोगों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि काम कराया ही नहीं गया और पूरी रकम आपस में मिल बांट ली गई है।