रायपुर निगम में ‘गायब फाइल’ कांड: गार्डन से लेकर 100 एकड़ जमीन तक, गड़बड़ी की आशंका गहराई

रायपुर। नगर निगम रायपुर में एक के बाद एक अहम फाइलों के गायब होने से प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ताजा मामला निगम मुख्यालय के सामने स्थित गार्डन से जुड़ी फाइल के लापता होने का है, जबकि इससे पहले जोन-10 अमलीडीह कार्यालय से करीब 100 एकड़ जमीन से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब होने का मामला सामने आ चुका है।

गार्डन फाइल गायब, पुराने विवाद फिर चर्चा में

मुख्यालय के सामने स्थित गार्डन पहले से ही नियम उल्लंघन को लेकर विवादों में रहा है। जानकारी के मुताबिक, गार्डन के रखरखाव के लिए निजी एजेंसी को जिम्मेदारी दी गई थी, जिसमें केवल 5% क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों (फूड स्टॉल/दुकान) की अनुमति थी। लेकिन आरोप है कि तय सीमा से अधिक हिस्से का व्यावसायिक उपयोग किया गया और सुरक्षा, साफ-सफाई व CCTV जैसी अनिवार्य व्यवस्थाओं में भी लापरवाही बरती गई।

अब इसी गार्डन से जुड़ी अहम फाइल के गायब होने से यह आशंका जताई जा रही है कि कहीं नियम उल्लंघन और गड़बड़ियों को छिपाने के लिए दस्तावेजों से छेड़छाड़ तो नहीं की गई।

जोन-10 से 100 एकड़ जमीन की फाइल भी लापता

इससे पहले जोन-10 अमलीडीह कार्यालय से बोरियाकला क्षेत्र के ओम नगर, साईं नगर और बिलाल नगर से जुड़े 69 भूखंडों की लेआउट फाइल गायब हो चुकी है। यह मामला करीब 100 एकड़ जमीन से जुड़ा बताया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, इस गड़बड़ी के पीछे बिल्डरों को फायदा पहुंचाने की आशंका जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि यह फाइल जोन कार्यालय से निगम मुख्यालय भेजी जानी थी, लेकिन उसे सीधे टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग भेज दिया गया, जिससे संदेह और गहरा गया है।

प्रशासनिक हलचल तेज

मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम आयुक्त ने जोन-10 के कमिश्नर विवेकानंद दुबे को मुख्यालय अटैच कर दिया है और उनकी जगह मोनेश्वर शर्मा को जिम्मेदारी सौंपी गई है। मोनेश्वर शर्मा ने संकेत दिए हैं कि इस मामले में जल्द FIR दर्ज कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

महापौर का बयान

महापौर मीनल चौबे ने कहा है कि गार्डन से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच की जा रही है। यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों और एजेंसी पर कड़ी कार्रवाई होगी।

बड़ा सवाल

लगातार फाइल गायब होने की घटनाएं यह सवाल खड़ा करती हैं कि क्या यह महज लापरवाही है या सुनियोजित तरीके से रिकॉर्ड्स गायब कर भ्रष्टाचार को छिपाने की कोशिश? फिलहाल, पूरे मामले में जांच जारी है और अब नजर इस बात पर है कि जिम्मेदारों पर कब और कितनी सख्त कार्रवाई होती है।

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