रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन प्रश्नकाल के दौरान कस्टोडियल डेथ का मुद्दा जोरदार ढंग से उठा। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेश बघेल ने उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा को घेरते हुए राज्य की जेलों में हो रही अस्वाभाविक मौतों पर गंभीर सवाल खड़े किए।
66 मौतें, 48 मामलों में जांच लंबित
भूपेश बघेल ने सदन में पूछा कि जनवरी 2025 से 31 जनवरी 2026 तक राज्य की जेलों में कितनी अस्वाभाविक मौतें हुईं और क्या सभी मामलों में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप न्यायिक जांच पूरी की गई है? उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने जवाब देते हुए बताया उक्त अवधि में केंद्रीय और जिला जेलों में कुल 66 बंदियों की मृत्यु हुई। इनमें से 18 मामलों में NHRC दिशा-निर्देशों के तहत न्यायिक मजिस्ट्रेट जांच पूरी हो चुकी है। शेष 48 प्रकरणों में जांच प्रक्रियाधीन है।
जेलों में क्षमता से अधिक कैदी
बघेल ने यह भी पूछा कि जेलों की क्षमता के मुकाबले कैदियों की संख्या 150 प्रतिशत से अधिक क्यों है? इसके अलावा उन्होंने हत्या, लूट और फिरौती जैसे जघन्य अपराधों में कथित 35 प्रतिशत वृद्धि और अंतर्राज्यीय ड्रग तस्करों की गिरफ्तारी का ब्योरा भी मांगा।
सरकार के जवाब पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि 66 मौतों में से केवल 18 मामलों में जांच पूरी होना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि जेलों में गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। जांच प्रक्रिया में अनावश्यक देरी की जा रही है। बघेल ने मांग की कि सभी लंबित मामलों की जांच तेजी से पूरी की जाए, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो और जेलों में क्षमता से अधिक बंदियों की समस्या का तत्काल समाधान निकाला जाए।