0 शासन और सत्ता की ही नहीं,पौराणिक भूमि भी है बस्तर
0 भक्तों ने निकाली मां ब्रह्मचारिणी की पालकी
जगदलपुर। नगर के मध्य स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर में आयोजित श्रीमद देवी भागवत महापुराण कथा के तीसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी, महाकाली, महालक्ष्मी, मां सरस्वती, दुर्गा और सृष्टि उत्पत्ति की कथा के साथ नवरात्रि विधान नियम की चर्चा हुई। इस मौके पर भागवत श्रोताओं को संबोधित करते हुए मानस मंदिर वाराणसी से पहुंचे आचार्य सुमीत भारद्वाज ने कहा कि फागुन के महीने में मां भगवती की आराधना करने से ज्ञान की प्राप्ति और जन्म मरण के चक्कर से मुक्ति मिलती है। आप सभी भाग्यशाली हैं, जहां मां दंतेश्वरी साक्षात विराजित हैं। बस्तर शासन और सत्ता की ही नहीं, पौराणिक भूमि भी है। प्राण प्रतिष्ठा का उद्देश्य देवता को अपने अंदर बिठाना होता है। पत्थर की मूर्ति में प्राण कैसे स्थापित होगा? मूर्ति के सामने बैठने से देव नहीं मिलते। देवी- देवताओं को साक्षी रख दया- करुणा भाव से मानव सेवा करना ही सच्ची सेवा और प्राण प्रतिष्ठा है। मंदिर की यज्ञशाला में लगातार तीसरी बार श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा आयोजित की गई है।

इस 10 दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान के तहत तीसरे दिन कथा बांचते हुए आचार्य ने कहा कि बलराम ने भी भाई कृष्ण के ऊपर लगे आरोप को दूर करने के लिए देवी भागवत कथा करवाई थी। तब कहीं जाकर भगवान कृष्ण पर लगे कौनतूक मणि चोरी का आरोप खत्म हुआ था। उन्होंने कहा कि मणि चमकती नहीं, अपने गुण से जन कल्याण की क्षमता रखती है, किंतु हम सब चमकते कांच के टुकड़ों को मणि मानकर ठगे जा रहे हैं और भ्रमित हो रहे हैं, चूंकि जब किसी के पास बहुमूल्य वस्तु आ जाती है तो वह दिखावा करने लगता है और यही उनकी साख गिराती है। आज की परिस्थिति में स्त्री सम्मान की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आजकल स्त्री को दो दृष्टि से देखा जाता है। पहला भारतीय और दूसरा यूरोपीय दृष्टि। भारतीय दृष्टि नारी को देवी की संज्ञा देती है। भारतीय दृष्टि तो अप्सरा को भी देवी मान पूजती है, किंतु यूरोपीय दृष्टि नारी को सिर्फ भोग की वस्तु मानती है। नारी तू नारायणी, यह भारतीय दृष्टिकोण की महत्वपूर्ण मान्यता है। आज दृष्टि को नहीं नियत को सुधारने की जरूरत है।
पालकी में विराजी मां ब्रह्मचारिणी
कथा के दौरान भक्तों ने मां दंतेश्वरी की चालीसा का सामूहिक पठन किया वहीं मां ब्रह्मचारिणी की झांकी निकाली गई। तत्पश्चात मां ब्रह्मचारिणी की पालकी ने नगर भ्रमण किया। यह पालकी दंतेश्वरी मंदिर की यज्ञशाला से सिरहासार, गोलबाजार, पैलेस रोड होती हुई वापस मंदिर परिसर पहुंची। आरती पश्चात प्रसाद वितरित किया गया। आज 21 फरवरी को भागवत अनुष्ठान के अंतर्गत मां चंद्रघंटा महात्म, सती चरित्र, राम अवतार, कृष्ण, योगमाया अवतार की कथा के बाद मां योग माया का जन्म उत्सव मनाया जा रहा है। उसके बाद दंतेश्वरी चालीसा पाठ फिर मां चंद्रघंटा की तीसरी पालकी निकाली जाएगी।