वन मंत्री केदार कश्यप बताये क्या प्रदेश में जंगलराज है जो वन विभाग शिकारियों का सामाजिक बहिष्कार, सामाजिक दण्ड, हुक्का पानी बंद कर सजा देगी – धनंजय सिंह

रायपुर। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्य जीव विभाग द्वारा शिकारियों को सामाजिक बहिष्कार की सजा के फैसले पर सवाल खड़ा करते हुये प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने वन मंत्री केदार कश्यप से पूछा, क्या प्रदेश में जंगलराज है जो शिकारियों को अब कानून नहीं बल्कि भीड़तंत्र सजा देगी? जो वन्य जीव जंतुओं के शिकार करने वाले शिकारियों का सामाजिक बहिष्कार कर, सामाजिक दंडित कर, हुक्का पानी बंद करने की सजा दी जायेगी। संविधान का शपथ लेने वाले मंत्री एवं संविधान के अधिकारों के तहत जिम्मेदारी निभाने की शपथ लेने वाले अधिकारी अब संविधान का पालन नहीं करेंगे। सामाजिक बहिष्कार को समाज हित में नहीं माना जाता। इससे घृणा, नफरत, जातिगत भेदभाव, तिरस्कार होता है, कई बार ये हिंसा का रूप ले लेता है। सामाजिक सौहार्द्र बिगड़ता है। फिर ये कैसा सामाजिक बहिष्कार करने फैसला लिया गया। ये तो बाबा साहब डॉ. भीम राव अम्बेडकर जी के लिखे संविधान का अपमान है। सामाजिक बहिष्कार जैसे कुरीतियों पर कड़ाई से रोक फिर भाजपा सरकार सामाजिक बहिष्कार का सरकारी फ़ैसला तो तानाशाही फरमान है।

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि वन विभाग वन्य जीव जंतुओं की रक्षा नहीं कर पा रही है। लगातार शिकार की घटनाएं हो रही है। अपनी नाकामी छुपाने अब सामाजिक बहिष्कार कराने जैसे सरकारी फैसला ले रही है। दिसम्बर 2025 में वन विभाग विभागीय बैठक में जो शिकारियों को पकड़ कर धर्म गुरु, गांव के मुखिया, प्रतिष्ठित व्यक्ति समाज सेवी संगठन के साथ बैठक कर समाजिक बहिष्कार कराने का फैसला लिया गया है ये तो वैमनस्यता फैलाने वाला है, संविधान के खिलाफ है। कांग्रेस मांग करती है इस फैसले पर तुरंत रोक लगाई जाये। शिकारियों को कानूनी तौर पर कड़ी से कड़ी सजा मिले। वन्य जीव जंतुओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो एवं सामाजिक बहिष्कार कराने जैसे फैसला लेने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्यवाही हो।

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