रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष दीपक बैज आज केंद्रीय जेल पहुंचे और शराब घोटाला मामले में जेल में बंद पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा से मुलाकात की। मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में बैज ने कहा कि दोनों के बीच लंबी और सार्थक चर्चा हुई। उन्होंने मजबूती से उम्मीद जताई कि फरवरी महीने में लखमा को जमानत मिल सकती है।
बैज ने कहा हमें न्यायालयीन प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है। लखमा के बाहर आते ही बस्तर और पूरे प्रदेश को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाएंगे।” उन्होंने जोर देकर कहा कि कवासी लखमा एक जनप्रतिनिधि हैं और विधानसभा के आगामी बजट सत्र में शामिल होना चाहते हैं। पिछले एक साल से वे सदन की कार्यवाही में भाग नहीं ले पाए हैं। लखमा के पास बस्तर और आदिवासियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, जिन्हें वे सदन में उठाना चाहते हैं। इसलिए बैज ने मांग की कि उन्हें सत्र में शामिल होने की अनुमति दी जाए।
पीसीसी चीफ ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है। उन्होंने कहा,प्रदेश में आदिवासी नेताओं को टारगेट किया जा रहा है। बदले की भावना से उन्हें जेल भेजा गया है। लेकिन कांग्रेस का कार्यकर्ता एकजुट है और हम इस मुद्दे पर कार्यकर्ताओं से निरंतर चर्चा करेंगे।
बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित शराब घोटाले की जांच में 15 जनवरी 2025 को कवासी लखमा को गिरफ्तार किया था। तब से वे न्यायिक रिमांड पर जेल में हैं। ED के आरोप हैं कि लखमा शराब सिंडिकेट के महत्वपूर्ण मददगार थे और सिंडिकेट उनके निर्देशों व संरक्षण में काम कर रहा था।
ED का मुख्य दावा:
- शराब नीति में बदलाव लखमा की महत्वपूर्ण भूमिका से हुए, जिनका उद्देश्य सिंडिकेट को अवैध लाभ पहुंचाना था।
- FL-10 लाइसेंस की शुरुआत लखमा के इशारे पर हुई, जिसके जरिए करोड़ों का भ्रष्टाचार हुआ।
- आबकारी विभाग में हर अवैध गतिविधि और भ्रष्टाचार की जानकारी लखमा को थी, लेकिन उन्होंने इसे रोकने के बजाय बढ़ावा दिया।
मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है। कांग्रेस को उम्मीद है कि फरवरी में सुप्रीम कोर्ट या संबंधित अदालत से राहत मिल सकती है।