0 धान खरीदी केंद्रों में बड़ा घोटाला, मिट्टी-कंकड़, बदरा, भूसा मिलाकर की जा रही है भरपाई
रायपुर। टोकन जारी होने के बाद जबरिया रकबा समर्पण को किसानों पर प्रशासनिक अत्याचार बताते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि सरकार के षड्यंत्र के चलते किसान अपने हक और अधिकार से वंचित हो रहे हैं। टोकन जारी होने के बाद उपार्जन के लिए किसानों का पुरा रकबा दर्ज नहीं किया जा रहा है, जिसकी वजह से उन्हें धान बेचने का अवसर नहीं मिल रहा है, बिना सहमति के रकबा समर्पण से किसान व्यथित हैं और अपने अधिकारों के लिए हैरान, परेशान होकर सोसायटियों के चक्कर काटने मजबूर हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि भाजपा की सरकार में धान खरीदी कमीशनखोरी, अव्यवस्था और बदइंतजामी की भेट चढ़ गई है, हर तरफ भ्रष्टाचार का आलम है। महासमुन्द जिले के घोंच सोसायटी में अमानक, गुणवत्ताहीन, पुराना, बदरा धान खरीदना पाया गया। सक्ती जिले के डभरा क्षेत्र अंतर्गत पुटीडीह धान खरीदी केंद्र में बड़े घोटाले का मामला सामने आया है। धान की बोरियों में मिट्टी और कंकड़ मिलाकर गड़बड़ी की जा रही है। जांच में खुलासा हुआ कि एक-एक बोरी में 5 से 10 किलो तक मिट्टी-कंकड़ मिलाए गए हैं। भौतिक सत्यापन के दौरान खरीदी केंद्र में करीब 3200 क्विंटल धान गायब पाया गया, जिसकी अनुमानित कीमत 99 लाख 20 हजार रुपये बताई जा रही है। इस भारी कमी को छुपाने और रिकॉर्ड में बराबरी दिखाने के लिए देर रात धान की बोरियों में मिट्टी-कंकड़ मिलाए जा रहे हैं। कई जगह वास्तविक खरीदी से ज्यादा धान संग्रहित है जो किसानों से अधिक तौलाई करके कांटा मार कर इकट्ठा किया गया है। पूरे प्रदेश में इसी तरह से भ्रष्टाचार की अंजाम दिया जा रहा है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि यह सरकार किसानों को परेशान कर रही है। ऑनलाइन टोकन बंद कर दिए गए, परिवहन और मीलिंग नहीं होने से सोसाइटी में धान जाम है जिसके कारण तौलाई धीमी कर दी गई है, लाखों किसान अब तक धान खरीदी से वंचित हैं, बड़ी मात्रा में उनका रकबा समर्पण कराया जा रहा है, हमाली की राशि और कट्टा में धान पलटी करने का काम भी किसानों से ही करवाया जा रहा है, धान उपार्जन की अंतिम तिथि में मात्र 9 दिन शेष हैं, सरकार के ही तय लक्ष्य में 40 प्रतिशत धान का उपार्जन बाकी है, प्रदेश के लाखों किसान अब तक धान बेचने से वंचित हैं और इस सरकार के इशारे पर एनआईसी सोसाइटियों में प्रतिदिन धान की खरीदी को दुर्भावना पूर्वक सीमित करने का काम कर रही है। यह सरकार किसानों का पूरा धान नहीं खरीदना चाहती।