एग्री स्टेक पोर्टल बंद, लाखों किसान पंजीयन से वंचित – दीपक बैज

रायपुर। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि धान खरीदी के लिए अनिवार्य किए गए एग्री स्टेक पोर्टल में पंजीयन बंद हो गया। अभी तक पूरे किसानों का पंजीयन नहीं हुआ है, पिछले साल के मुकाबले लाखों किसान पंजीयन से वंचित है। एग्री स्टेक पोर्टल में आने वाली दिक्कतों पोर्टल बंद रहने, डाटा की गड़बड़ियों खसरा खतौनी में मिलान नहीं होने से बहुत से किसानों का पंजीयन नहीं हो पाया है। कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि पोर्टल में पंजीयन की तिथि और बढ़ाई जाय। जिनका पंजीयन पोर्टल से नहीं हो रहा उनका पंजीयन सोसायटियों में करने की वैकल्पिक व्यवस्था की जाय।

एग्री स्टेक पोर्टल में पंजीयन के बाद सोसायटियों में रकबा का भौतिक सत्यापन कराने अनिवार्यता सरकार की चाल

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि जिन किसानों ने धान बेचने के लिए एग्री स्टेक पोर्टल में पंजीयन करवा लिया है सरकार ने उनके लिए नया नियम बना दिया कि उन्हें अब सोसायटियों में रकबा सत्यापन कराना होगा। गिरदावरी डिजिटल क्राप सर्वे के बाद भी रकबा सत्यापन करने किसानों को परेशान करने के लिए अनिवार्य किया गया है। सरकार को किसानों पर भरोसा नहीं है किसान झूठ बोलकर धान बेचेंगे क्या? सरकार किसानों का पूरा धान खरीदना नहीं चाहती इसलिए तमाम नियम कायदे बना कर परेशान किया जा रहा है।

नक्सली समर्पण की टाइमिंग सवाल खड़ा कर रही

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि आज खबरे छपी है कि बस्तर में 103 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। तीन दिन पहले भी कुछ नक्सलियों के समर्पण की खबरे आई थी। आज ही एक खबर और आई है कि सुकमा में नक्सलियों ने 2 ग्रामीणों की हत्या कर दिया। एक खबर और आई है कि बीजापुर में पुलिस और नक्सलियों में मुठभेड़ हुआ। यह तीनों खबरे विरोधाभाषी है, नक्सलियों द्वारा निहत्थे ग्रामीणों की हत्या, पुलिस नक्सली मुठभेड़ और सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर सैकड़ों की संख्या में नक्सलियों का समर्पण यह सब आपस में विरोधाभाषी है। एक बड़ा सवाल यह समर्पण अमित शाह के दौरे के एक दिन पहले ही हुआ। यह सरकार इवेंट लग रहा सरकार सभी समर्पित नक्सलियों का प्रोफाइल सार्वजनिक करे।

अमित शाह गुटबाजी से परेशान हो के आ रहे

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद भाजपा में असंतोष और गुटबाजी हावी हो गई है। वरिष्ठ विधायक अपनी उपेक्षा से नाराज और लामबंद हो गए है। सरकार पर खतरा मंडरा रहा है। सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हो रही है, बिगड़ती कानून व्यवस्था भ्रष्टाचार के कारण सरकार बदनाम हो चुकी है। इसी डेमेज कंट्रोल के लिए अमित शाह छत्तीसगढ़ आ रहे, बस्तर दौरा तो एक बहाना है हकीकत में वे राजधानी में रुक कर मान मनौव्वल करेंगे।

विशेष पुनरीक्षण के लिए रायपुर ग्रामीण ही क्यों ?

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के लिए रायपुर ग्रामीण विधानसभा को पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में लिया है। सवाल उठता है रायपुर ग्रामीण ही क्यों? मतदाता सूची पुनरीक्षण में 2003 की मतदाता सूची को आधार बनाया जाएगा। रायपुर ग्रामीण में उरला, भनपुरी, उरकुरा, सोनडोंगरी, सरोरा जैसे औद्योगिक क्षेत्र है। सिलतरा औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले भी रायपुर ग्रामीण में ही निवास करते है। बड़ी संख्या में वहां लोग 2003 के बाद डेढ़-दो दशक से दूसरे प्रांतों से आकर काम कर रहे ऐसे में उनका नाम 2003 की मतदाता सूची में नहीं होगा। इस आधार पर नाम काट के प्रोपोगंडा किया जाएगा। जबकि 2003 के बाद की मतदाता सूची में उन सभी का नाम दर्ज है क्योंकि वे यह दशकों से स्थाई रूप से निवास करते है। पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में रायपुर उत्तर विधानसभा या दक्षिण विधानसभा को अन्य किसी विधानसभा को क्यों नहीं लिया गया?

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