नीबू’ से विरोधियों के पेट में जबरदस्त मरोड़ पैदा कर दी बाबा भोजराज नाग ने तो!

0 नीबू की विशेषता पर दिए उनके बयान से विरोधी खेमे में मच गई खलबली 

(अर्जुन झा) जगदलपुर। बस्तर संभाग की कांकेर लोकसभा सीट से एक सनातनी आदिवासी भोजराज नाग को भाजपा ने प्रत्याशी बनाकर विरोधी दलों के नेताओं को जो सिरदर्द दे दिया है, उसकी काट विरोधी नेता अब तक नहीं निकाल पाए हैं। वहीं अब भाजपा प्रत्याशी भोजराज नाग ने एक नीबू से विरोधी नेताओं के पेट में ऐसी मरोड़ पैदा कर दी है कि कुछ पूछो मत। एक चुनावी सभा में भाजपा प्रत्याशी भोजराज नाग ने नीबू का महत्व समझते हुए कुछ ऐसी बातें कह दी कि विरोधी खेमे में जबरदस्त खलबली मच गई है।
अपने पाठकों की जानकारी के लिए यहां यह बताना जरूरी है कि भोजराज नाग बस्तर संभाग के जाने माने वैद्य हैं। वे पुराने और असाध्य रोगों का भी इलाज प्राचीन आयुर्वेदिक पद्धति से करते हैं। रोगों के उपचार के लिए जंगली जड़ी बूटियों और नीबू, आंवला, हर्रा, बेहरा जैसे फलों व पेड़ों की छाल का उपयोग करते हैं। कांकेर लोकसभा क्षेत्र की एक चुनावी सभा में भाजपा प्रत्याशी भोजराज नाग ने नींबू से और नींबू को निचोड़कर लोगों की दैवीय परेशानी दूर करने की बात कही। इसका मतलब है आयुर्वेदिक तरीके से लोगों को उपचार करने कराने की सलाह। वैसे भी नींबू का उपयोग पूजा के अलावा कई प्रकार के रोगों में भी किया जाता है। विशेष रूप से अजीर्ण के रोगियों के लिए नीबू लाभकारी है। अब जिन लोगों की बुद्धि ही अजीर्ण की चपेट में आ गई हो, उनका इलाज भी नींबू से ही संभव है। दैहिक और दैविक रोग या समस्या का इलाज नींबू से ही होता है। भारत में आदिकाल से लोग आयुर्वेद का सहारा लेकर अपने को स्वस्थ रखते आ रहे हैं। अब एलोपैथी का उपयोग करके अपने को चंगा रखते हैं। बावजूद बस्तर में आज भी हजारों लोग प्राचीन पद्धति से अपना इलाज कराना ज्यादा पसंद करते हैं।भोजराज नाग ने चुनावी समीकरण के तहत नींबू को निचोड़ कर लोगों का दुख दूर करने का दावा किया। वह दुख दैविक और दैहिक भी हो सकता है। जब लोग दुख से परे रहेंगे, तब वे अपने लिए खुद स्वालंबन की राह चुन पाएंगे। पुरातन काल से से चले आ रहे नींबू के रहस्य को उन्होंने लोगों के स्वास्थ्य से जोड़ा है। राजनीतिक विरोधियों के पेट में होने वाले दर्द को नींबू निचोड़कर ठीक करने का उन्होंने दावा किया।
छत्तीसगढ़ में बैगा गुनिया को लोग भावनात्मक रूप से मानते और पूजते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी बैगा गुनिया की शरण में जाकर अपने हाथों पर कोड़े अक्सर दशहरा पर्व पर लगवाते रहे हैं। वहीं कांग्रेस सरकार के पूर्व मंत्री कवासी लखमा को देवता झूंपते और खुद के शरीर को सांकल मार मारकर लहूलुहान करते सैकड़ों लोगों ने देखा है। सभी राजनीतिक दल प्रसिद्ध लोगों को ही टिकिट देते हैं। चूंकि भोजराज नाग एक लोकप्रिय वैद्य और गुनिया हैं। उन्होंने देवगुड़ी के माध्यम से अपने आदिवासी समाज की रीति रिवाजों से लेकर आदिवासी परंपराओं को संरक्षित करने का बेहतरीन काम किया है। ऐसे में उनका यह बयान इस संदर्भ में काफी महत्व रखता है। उनके इस बयान को विरोधी दल किसी भी रूप में लेकर आलोचना करें, किंतु भोजराज के इस बयान ने पूरे प्रदेश के लोगों का ध्यान खींचा है। बीजेपी सनातन के लिए संघर्ष करने की बात करती है, इस अभियान में उनके प्रत्याशी अगर यह बयान देते हैं, तो उसकी सराहना सनातनी हिंदू समाज भी अब खुलकर कर रहा है।

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