रायपुर। राजधानी में साइबर ठगी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। इस बार जालसाज ने किसी आम ग्राहक को नहीं, बल्कि भारतीय स्टेट बैंक की आईजीकेवी शाखा की बैंक मैनेजर को ही अपने झांसे में ले लिया। आरोपी ने खुद को कार कंपनी का संचालक बताकर करीब 2 करोड़ रुपये की एफडी कराने की बात कही और इसी बहाने बैंक मैनेजर से 4 लाख 99 हजार रुपये दूसरे बैंक खाते में ट्रांसफर करा लिए।
मामला तेलीबांधा थाना क्षेत्र का है। बैंक मैनेजर श्वेता शर्मा की शिकायत पर पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ BNS की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पहले 2 करोड़ की FD का भरोसा, फिर मांगे 4.99 लाख
पुलिस के मुताबिक, 20 अगस्त को श्वेता शर्मा के मोबाइल पर एक व्यक्ति ने फोन किया। कॉल रिसीव नहीं होने पर आरोपी ने मैसेज के जरिए संपर्क किया। उसने अपना नाम प्रशांत मंधान बताया और खुद को इंटारा कार कंपनी का संचालक बताया।
आरोपी ने अगले दिन करीब 2 करोड़ रुपये की एफडी कराने की इच्छा जताते हुए ब्याज दर की जानकारी ली। बैंक मैनेजर ने उसे 6.45 प्रतिशत ब्याज दर बताई। आरोपी ने जल्द बैंक पहुंचकर एफडी कराने की बात कहकर भरोसा कायम कर लिया।
इसके बाद उसने अचानक बैंक मैनेजर से संपर्क किया और बताया कि उसकी चेकबुक खत्म हो गई है तथा मेडिकल भुगतान के लिए उसे तत्काल रकम की जरूरत है। आरोपी ने बैंक मैनेजर से 4 लाख 99 हजार रुपये RTGS के जरिए ट्रांसफर करने का अनुरोध किया।
फर्जी ई-मेल से भेजा भुगतान का आवेदन
आरोपी ने भुगतान के लिए एक फर्जी ई-मेल आईडी से आवेदन भेजा। दस्तावेज और हस्ताक्षर का मिलान करने के बाद बैंक मैनेजर ने दोपहर करीब 1:20 बजे मुंबई के कुर्ला स्थित केनरा बैंक खाते में रकम ट्रांसफर कर दी।
लेकिन करीब 40 मिनट बाद संबंधित कंपनी के मैनेजर ने बैंक से संपर्क किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कंपनी की ओर से ऐसा कोई भुगतान आवेदन भेजा ही नहीं गया था। इसके बाद बैंक अधिकारियों को पूरे मामले में फर्जीवाड़े का शक हुआ।
कंपनी के रिकॉर्ड में नहीं था नंबर और ई-मेल
जांच करने पर पता चला कि आरोपी द्वारा इस्तेमाल किया गया मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी कंपनी के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं था। इसके बाद बैंक अधिकारियों को ठगी का पूरा अंदेशा हुआ और मामले की शिकायत पुलिस से की गई।
अब तेलीबांधा पुलिस आरोपी के मोबाइल नंबर, फर्जी ई-मेल आईडी और जिस बैंक खाते में रकम भेजी गई, उसकी तकनीकी जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि ठगी की रकम आगे कहां ट्रांसफर हुई और इस वारदात के पीछे अकेला आरोपी है या साइबर ठगों का पूरा गिरोह सक्रिय है।