० सर्व शिक्षक फेडरेशन के जिला अध्यक्ष पाणिग्रही ने शिक्षकों से की मार्मिक अपील
जगदलपुर। सर्व शिक्षक फेडरेशन के बस्तर जिला अध्यक्ष भूपेश पाणिग्रही ने टीईटी की बाध्यता, पदोन्नति के नए नियम, वेतन विसंगति और शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं को लेकर बड़ा बयान दिया है। श्री पाणिग्रही ने कहा है कि कहा है कि जब जब गुरुओं को परेशान किया गया बड़े बड़े साम्राज्य ढह गए। इस बार अपने जीवन को सुरक्षित करने के लिए लड़ाई है।
सर्व शिक्षक फेडरेशन के जिला अध्यक्ष भूपेश पाणिग्रही ने कहा है कि यह अभी नहीं तो कभी नहीं का मसला है।नौकरी बचाने के लिए अब सभी संवर्गों के शिक्षकों और शिक्षक संगठनों को एकजुट होना ही होगा।उन्होंने कहा- आज हम केवल टीईटी की परीक्षा की बात नहीं कर रहे हैं।आज सवाल हमारी वर्षों की सेवा, हमारी नौकरी, हमारा परिवार और हमारा भविष्य का है। जिस शिक्षक ने अपनी जिंदगी के महत्वपूर्ण वर्ष बच्चों को पढ़ाने में लगा दिए, जिसने दूर-दराज के गांवों में सेवा दी, जिसने हर परिस्थिति में स्कूल संभाला, आज उसी शिक्षक के सामने अपनी नौकरी बचाने के लिए एक नई चुनौती खड़ी है। श्री पाणिग्रही ने कहा है कि अगर आज हम चुप बैठे रह गए, तो कल हमारे परिवार से हर कोई पूछेगा कि जब नौकरी पर संकट आया था, तब आपने आवाज क्यों नहीं उठाई?” यह लड़ाई किसी व्यक्ति, किसी पदाधिकारी या किसी एक संगठन की नहीं है। यह हर उस शिक्षक की लड़ाई है जिसके हाथ में वर्षों की सेवा का अनुभव है और जिसके कंधे पर अपने परिवार तथा देश के भविष्य की बड़ी जिम्मेदारी है। भूपेश पाणिग्रही ने कहा-हम सरकार से टकराव नहीं चाहते। हम केवल इतना चाहते हैं कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के साथ न्यायपूर्ण, व्यावहारिक और मानवीय समाधान निकाला जाए। हमारी मांग स्पष्ट है कि टीईटी अनिवार्यता के कारण वर्षों से कार्यरत शिक्षकों की नौकरी पर संकट न आए। इसके लिए विशेष टीईटी विभागीय परीक्षा अथवा अन्य न्यायसंगत व्यवस्था का अवसर दिया जाए और सेवा सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। श्री पाणिग्रही ने साथियों से कहा है कि आज घर बैठकर चिंता करने से समस्या हल नहीं होगी। आज हमें अपनी आवाज सरकार और समाज तक पहुंचानी होगी। अपने बच्चों के भविष्य के लिए, अपने परिवार की सुरक्षा के लिए, अपने सम्मान के लिए और अपनी वर्षों की सेवा की सुरक्षा के लिए अब हमें चुप नहीं रहना है, अब पीछे नहीं हटना है। अब हर शिक्षक को एकजुट होना ही होगा।नौकरी बचानी है तो आवाज उठानी होगी। अधिकार बचाने हैं तो संघर्ष करना ही होगा।