TET की बाध्यता के खिलाफ शिक्षक संगठनों की एकजुटता की मांग, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और पदोन्नति में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर विरोध तेज होता जा रहा है। छत्तीसगढ़ प्रदेश शासकीय शिक्षक फेडरेशन ने TET की बाध्यता समाप्त करने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है। संगठन ने इसे प्रदेश के हजारों शिक्षकों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए सभी शिक्षक संगठनों से एकजुट होकर आंदोलन की रणनीति तैयार करने की अपील की है।

फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष शंकर साहू ने कहा कि नौकरी में बने रहने की सेवा सुरक्षा और पदोन्नति में TET की अनिवार्यता शिक्षकों के सामने बड़ी चुनौती बन गई है। उनके मुताबिक यह केवल किसी एक संवर्ग या संगठन की समस्या नहीं है, बल्कि प्राथमिक, माध्यमिक और अन्य वर्गों के हजारों शिक्षकों से जुड़ा विषय है। ऐसे में इसका समाधान भी सामूहिक प्रयास से ही संभव होगा।

शंकर साहू ने कहा कि TET के मुद्दे पर सभी शिक्षक संगठनों को आपसी मतभेद भुलाकर एक साझा मंच पर आना चाहिए। उन्होंने राज्य स्तर पर व्यापक आंदोलन की जरूरत बताते हुए कहा कि आवश्यकता पड़ने पर इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर तक ले जाने की रणनीति भी तैयार की जानी चाहिए। उनका कहना है कि संगठित और लोकतांत्रिक तरीके से दबाव बनाने पर ही सरकार से सकारात्मक निर्णय की उम्मीद की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि किसी एक संगठन के प्रयास से इस लड़ाई को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाना संभव नहीं है। प्रत्येक शिक्षक के हित को समान महत्व देते हुए सभी संगठनों की भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने नौकरी जाने के डर, सरकारी स्तर पर निर्णय में देरी और अलग-अलग संगठनों के अलग-अलग तरीके से आंदोलन करने को एकता के सामने बड़ी चुनौती बताया।

फेडरेशन के अनुसार, TET की बाध्यता को लेकर संगठन की ओर से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मुख्य सचिव और लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक से बातचीत कर ज्ञापन के माध्यम से अपनी मांग रखी जा चुकी है। संगठन का दावा है कि इस मुद्दे को अब व्यापक स्तर पर उठाया जा रहा है और शिक्षकों के बीच भी इसे लेकर चर्चा तेज है।

शंकर साहू ने बताया कि छत्तीसगढ़ संयुक्त शिक्षक महासंघ से जुड़े 16 शिक्षक संगठनों की बैठक जल्द रायपुर में आयोजित की जाएगी। बैठक में TET की अनिवार्यता के साथ-साथ पदोन्नति से संबंधित अन्य विषयों पर भी चर्चा होगी। इस दौरान संयुक्त आंदोलन की रूपरेखा और आगे की रणनीति तय किए जाने की संभावना है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन की मुख्य चिंता शिक्षकों की सेवा सुरक्षा को लेकर है। उनका कहना है कि TET की वजह से किसी शिक्षक की नौकरी प्रभावित नहीं होनी चाहिए। पदोन्नति से जुड़े नियमों पर अलग से चर्चा हो सकती है, लेकिन लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को नौकरी जाने के भय में नहीं रखा जाना चाहिए।

फेडरेशन ने शिक्षकों के अन्य सेवा संबंधी अधिकारों का मुद्दा भी उठाया है। संगठन का कहना है कि पुरानी सेवा की गणना, समयमान वेतनमान, क्रमोन्नति और पुरानी पेंशन जैसे विषय शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण हैं। लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारियों को मिलने वाले लाभों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

शंकर साहू ने प्रदेश के सभी शिक्षक संगठनों से व्यक्तिगत मतभेद और संगठनात्मक सीमाओं से ऊपर उठकर साझा संघर्ष में शामिल होने की अपील की। उन्होंने प्राथमिक शिक्षक से लेकर प्राचार्य तक सभी शिक्षकों को एक मंच पर आने का आह्वान करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयास के जरिए ही सरकार के सामने अपनी मांग मजबूती से रखी जा सकती है।

फेडरेशन ने अपनी मांग को लेकर आगे भी आंदोलन जारी रखने के संकेत दिए हैं। संगठन का कहना है कि शिक्षकों की सेवा सुरक्षा से जुड़े इस विषय पर सरकार को गंभीरता से विचार करते हुए जल्द सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए। शिक्षकों के बीच एकजुटता बढ़ाने और संयुक्त आंदोलन की दिशा में आगामी बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।