चुनाव में साथ न देने का बदला ले रहे हैं उप सरपंच


०  मरेठा पंचायत के राशन विक्रेता और उप सरपंच निकाल रहे हैं खुन्नस 

०  सरगीगुड़ा के ग्रामीणों को नहीं दे रहे राशन 
(अर्जुन झा)
बकावंड। बस्तर जिले के विकासखंड बकावंड से एक ऐसा मामला सामने आया है, जो आजाद भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया का मजाक उड़ा रहा है। यहां सरपंच और शासकीय उचित मूल्य दुकान के संचालक ने चुनावी खुन्नस में पूरी बस्ती को सरकारी राशन से वंचित कर दिया है। हैरानी की बात तो यह है कि खाद्य विभाग के अधिकारी भी उप सरपंच और दुकान संचालक के हिमायती बन बैठे हैं। अब पीड़ित ग्रामीणों बकावंड के एसडीएम के समक्ष न्याय के लिए गुहार लगाई है।
ग्राम पंचायत मरेठा के सरपंच और सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकान के संचालक ने कुछ माह से ग्राम पंचायत को राजनीतिक अखाड़े में तब्दील कर दिया है।शासन की योजनाओं का लाभ दिलाने के मामले में ग्रामीणों के साथ खुलकर भेदभाव किया जा रहा है। सन 2025 में हुए पंचायत चुनाव की खुन्नस ग्रामीणों से निकाली जा रही है। मरेठा पंचायत कर सरगीगुड़ा बस्ती के लोगों को यह कहकर सरकारी राशन से वंचित कर दिया है कि पिछले चुनाव में सरपंच और उनके पैनल को साथ नहीं दिया था। कोरोना काल में कोई भी भूखा न सोए की अवधारणा के साथ शुरू की गई हर परिवार को 35 किलो चावल या गेहूं देने की योजना के लाभ से सरगीगुड़ा बस्ती के ग्रामीणों को वंचित कर दिया गया है। ग्रामीणों के मुताबिक राशन दुकान संचालक और सरपंच खुलकर कहते हैं कि तुम लोगों ने चुनाव में हमारा साथ नहीं दिया था, इसलिए तुम सभी को चावल राशन नहीं दिया जाएगा। चावल न मिलने से ग्रामीणों के सामने भुखमरी की नौबत आ गई है। खरीफ फसल के लिए ग्रामीणों ने घरों में रखा धान खेतों में बो दिया है और फसल पकने में अभी करीब डेढ़ दो माह का समय लगेगा। ऐसे में सरकारी राशन न मिलने से ग्रामीण बहुत ज्यादा परेशान हैं। ग्रामीण मामले की शिकायत खाद्य विभाग से कर चुके हैं, मगर विभाग ग्रामीणों को न्याय नहीं दिला रहा है। खाद्य निरीक्षक एक तरह से सरपंच और दुकान संचालक की हिमायत करते हुए मामले अपने उच्च अधिकारियों के पास विचाराधीन होने की बात कहकर टालते जा रहे हैं। परेशान ग्रामीणों ने अब बकावंड एसडीएम को आवेदन देकर न्याय के लिए गुहार लगाई है। आवेदन में बैसाखू कश्यप, सुकरू कश्यप और अन्य ग्रामीणों ने एसडीएम से तत्काल हस्तक्षेप कर राशन दिलाने का आग्रह किया है। इन ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि उनके हिस्से के रोके गए चावल की कालाबाजारी कर दी गई है।