फोटो कैप्शन…साल वनों का द्वीप कहलाने वाले बस्तर में आदिवासी समुदाय का जंगल व बांस से गहरा संबंध है. जनजातीय समुदाय के जीवन यापन में अन्य वनोपज समेत बांस की अहम भूमिका है. इससे महिलाएं टोकरी समेत कई घरेलू उपयोग की वस्तुएं बनाकर बाजार में बेचती हैं. वही सीजन में इसके फूल को तोड़कर सब्जी के रूप में बेचा जाता है. जिसे बास्ता व करील कहा जाता है. दुधमूहे बच्चों को सुलाने के लिए भी बांस का टोकरा पालने व झूले की तरह उपयोग में लाया जाता है. यह दृश्य गरबा ब्लॉक के कांदानार गांव का है.
फोटो कैप्शन…साल वनों का द्वीप कहलाने वाले बस्तर में आदिवासी समुदाय का जंगल व बांस से गहरा संबंध है. जनजातीय समुदाय के जीवन यापन में अन्य वनोपज समेत बांस की अहम भूमिका है. इससे महिलाएं टोकरी समेत कई घरेलू उपयोग की वस्तुएं बनाकर बाजार में बेचती हैं. वही सीजन में इसके फूल को तोड़कर सब्जी के रूप में बेचा जाता है. जिसे बास्ता व करील कहा जाता है. दुधमूहे बच्चों को सुलाने के लिए भी बांस का टोकरा पालने व झूले की तरह उपयोग में लाया जाता है. यह दृश्य गरबा ब्लॉक के कांदानार गांव का है.