डॉक बम शिवभक्तों ने 18 किमी दौड़ कर किया रामपाल में पूजन

0 बस्तर में फिर निकली डॉक कांवड़ यात्रा 
0 जगदलपुर से प्राचीन रामपाल शिव मंदिर तक शिवभक्तों ने की यात्रा 
0 गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा मिले : मुन्ना कोरी
0 दंडकारण्य क्षेत्र रहा है शैव साधना का प्रमुख केंद्र : रोहन कुमार 
जगदलपुर। पवित्र श्रावण मास के अवसर पर बस्तर संभाग में द्वितीय वर्ष डाक कांवड़ यात्रा का आयोजन श्रद्धा एवं उत्साह के साथ किया गया। इस यात्रा में बड़ी संख्या में शिवभक्तों ने भारी बारिश में भाग लेकर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त किया।
यात्रा का शुभारंभ जगदलपुर के महादेव घाट स्थित इंद्रावती नदी में विधिवत जलपूजन के साथ हुआ। इसके पश्चात डाक बम कावड़ियों ने लगभग 18 किलोमीटर की यात्रा बिना रुके दौड़ते हुए प्राचीन रामपाल शिव मंदिर पहुंचे। जहां भगवान शिव का जलाभिषेक किया गया। आयोजन का उद्देश्य भगवान भोलेनाथ की आराधना के साथ साथ सनातन परंपराओं का संरक्षण, धार्मिक जागरूकता एवं गौ माता को राष्ट्र माता बनाने की मांग पर आधारित था।रामपाल मंदिर के पुजारी कैलाश ठाकुर ने बताया पीढ़ी दर पीढ़ी उनका परिवार इस प्राचीन मंदिर में भगवान शिव की पूजा अर्चना एवं सेवा की परंपरा का निर्वहन करता आ रहा है। स्थानीय जनश्रुति के अनुसार वनवास काल में प्रभु श्रीराम ने इस शिवलिंग की स्थापना की थी, जिसके कारण यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र माना जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि मंदिर परिसर में लगभग 18वीं शताब्दी की एक प्राचीन घंटी आज भी सुरक्षित है, जो इस स्थल की ऐतिहासिक महत्ता को दर्शाती है। स्थानीय मान्यता है कि अंग्रेजी शासनकाल में भी अधिकारी एवं आमजन यहां आकर भगवान शिव की पूजा अर्चना किया करते थे। गौ सेवक रोहन कुमार ने बताया कि रामपाल का प्राचीन शिवालय नलकालीन धरोहर है। यहां स्थापित शिवलिंग नलकाल का माना जाता है तथा वर्तमान शिवालय का निर्माण पांचवीं-छठी शताब्दी के मध्य हुआ था। उस समय दंडकारण्य क्षेत्र शैव साधना का प्रमुख केंद्र था, जिसके कारण गांव-गांव में शिव मंदिरों का निर्माण हुआ। विशेष बात यह है कि पांचवीं छठी शताब्दी का यह प्राचीन शिवालय आज भी नियमित रूप से पूजित है और श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है। गौ सेवक मुन्ना कोरी ने कहा कि इस डाक कांवड़ यात्रा के माध्यम से गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की मांग को भी जन जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था और गौ संरक्षण का संदेश समाज तक पहुंचाना इस यात्रा का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।

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