0 रोज गिरते पड़ते स्कूल पहुंचते हैं विद्यार्थी
0 सोलगुड़ा के बच्चों के लिए डिजीटल इंडिया अभी भी है कोसों दूर
जगदलपुर। एक ओर डिजीटल इंडिया, विकसित भारत और ग्रामीण विकास के नए आयाम गढ़ने का दावा किया जा रहा है, वहीं बस्तर जिले के भानपुरी क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत बनियागांव के आश्रित ग्राम सोलगुड़ा की तस्वीर इन दावों पर सवाल खड़े करती नजर आती है। गांव तक पहुंचने वाली सड़क बारिश के दिनों में कीचड़ और जलभराव का दलदली हो जाती है, जिससे ग्रामीणों का रोजमर्रा का जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
करीब 55 से 60 परिवारों वाले इस छोटे से गांव में सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को झेलनी पड़ रही है। हर दिन छात्र-छात्राएं पढ़ाई के लिए इसी बदहाल रास्ते से स्कूल जाने को मजबूर हैं। सड़क पर इतना कीचड़ है कि साइकिल चलाना तो दूर, पैदल चलना भी किसी चुनौती से कम नहीं। कई बार बच्चे फिसलकर गिर जाते हैं, जिससे हादसों का खतरा लगातार बना रहता है। गांव की तस्वीरें भी हालात की गंभीरता बयां करती हैं। स्कूली छात्राएं कंधे पर बस्ता और हाथ में साइकिल थामे कीचड़ से जूझते हुए स्कूल पहुंचने का प्रयास करती दिखाई देती हैं। यह दृश्य ग्रामीण अंचलों में मूलभूत सुविधाओं की वास्तविक स्थिति को उजागर करता है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से सड़क निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिलता है।चुनावी मौसम में जनप्रतिनिधि सड़क, नाली और अन्य विकास कार्यों के बड़े-बड़े वादे करते हैं, मगर चुनाव समाप्त होते ही गांव की समस्याएं फिर उपेक्षा की भेंट चढ़ जाती हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन, पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित विभाग से जल्द से जल्द सड़क निर्माण की मांग करते हुए कहा है कि बच्चों की शिक्षा और ग्रामीणों की सुरक्षा को देखते हुए अब और इंतजार उचित नहीं है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
सोलगुड़ा तक शीघ्र पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए। बरसात में जलभराव रोकने के लिए समुचित नाली व्यवस्था विकसित की जाए।
सड़क बनने तक स्कूली बच्चों और ग्रामीणों की सुविधा के लिए तत्काल अस्थायी मरम्मत कराई जाए। ग्रामीणों का कहना है कि विकास के दावों की वास्तविक तस्वीर तभी बदलेगी, जब गांवों तक बुनियादी सुविधाएं कागजों से निकलकर जमीन पर दिखाई देंगी।