बस्तर में मलेरिया के फैलाव के लिये स्वास्थ्य मंत्री की लापरवाही जिम्मेदार – कांग्रेस

 

रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को बस्तर संभाग में सेरेब्रल मलेरिया के फैलाव और कांकेर के आदिवासी हॉस्टल में तीन बच्चों की मृत्यु का जिम्मेदार ठहराया है।

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने केंद्र सरकार से सवाल किया है की पिछले 3 वर्षों में डबल इंजन सरकार द्वारा प्राप्त राशि का विकेंन्द्रिकरण क्यों नहीं किया? आदिवासी हितों का ढोंग करने वाली राज्य सरकार ने स्थानीय स्तर पे खनिज निधि या CSR मद से खरीदी क्यों नहीं की? प्रदेश की जनता डबल इंजन सरकार के केंद्र के मंत्री और छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री से यह जवाब चाहती है कि पिछले तीन वर्षों से यह राशि प्राप्त क्यों आबाटित नहीं हुई?कमीशन खोर जिला कलेक्टरों ने जिला खनिज मद और कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी से मच्छरदानी खरीदने का आदेश क्यों पूरा नहीं किया?

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने स्वास्थ्य विभाग और जिला स्तर पर हो रही भारी कमीशन खोरी को इसका कारण बताते हुए कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मेडिकेटेड मच्छरदानी की रेट पर अधिकारीयों को कमीशन मिलना संभव नहीं था इसीलिए मच्छरदानी की खरीदी नहीं की जा सकी! स्वास्थ्य मंत्री द्वारा मच्छरदानी खरीदी ना होने पर अनभिज्ञता प्रकट करना, आग लगने पर कुआं खोदने जैसा उपक्रम है।

भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान में शानदार सफलता प्राप्त करके मलेरिया को एक प्रतिशत से कम दर पर ले आया था कुछ दिनों पहले स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अपनी स्वयं की पीठ थपथपाते हुए सार्वजनिक कार्यक्रम में यह कहा था बस्तर में मलेरिया मृत्यु दर दशमलव से नीचे दहाई अंक तक पहुंच गई है कांकेर के हॉस्टल में बच्चों की मृत्यु यह केवल एक अत्यंत ही दुखद दृश्य है।

15 साल के भारतीय जनता पार्टी सरकार में नक्सली हिंसा से कम मलेरिया से ज्यादा जवानों की मृत्यु हुई है, यह शाश्वत सत्य है। विष्णु देव सरकार की नाकामी कीबेक और मिसाल है यह परिदृश्य मलेरिया मुक्त बस्तर कार्यक्रम में पुनः विफलता से मलेरिया फिर से डरावनी स्थिति की ओर बढ़ गया है, यही स्थिति रही तो ना जाने कितने और मासूमों को अपनी जान गवानी पड़े।

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