सरपंच को वोट नहीं दिया तो काट दिया पीएम आवास सूची से नाम!

०  परित्यक्ता महिलाओं को हक से वंचित किया छोटे जीराखाल के सरपंच और सचिव ने 
बकावंड। विकासखंड बकावंड में साय के सुशासन को पंचायत प्रतिनिधि और अधिकारी किस तरह पलीता लगा रहे हैं, इसका एक बड़ा उदाहरण ब्लॉक की ग्राम पंचायत से सामने आया है। यहां पात्र और चयनित हितग्राहियों को सरकारी योजनाओं के लाभ महज इसलिए से वंचित कर दिया गया, क्योंकि उन्होंने पंचायत चुनाव के दौरान सरपंच के पक्ष में वोट नहीं दिया था।
केंद्र की मोदी सरकार और छत्तीसगढ़ की साय सरकार भले ही अंत्योदय के लक्ष्य के साथ काम कर रही हैं, मगर पंचायत प्रतिनिधि और अधिकारी सरकारों के सारे किए धरे पर पानी फेरने में लगे हुए हैं। बकावंड विकासखंड की ग्राम पंचायत छोटे जीराखाल से जो सच्चाई निकल कर सामने आई है, वह रोंगटे खड़े करने वाली है। वोट की राजनीति के फेर में सेवा का धर्म भूल चुके पंचायत प्रतिनिधियों ने गरीब, परित्यक्ता महिलाओं का हक छीन लिया है। पात्र, जरूरतमंद और चयनित होने के बावजूद इन महिलाओं को प्रधानमंत्री आवास का लाभ महज इसलिए नहीं दिया गया क्योंकि उन्होंने मौजूदा सरपंच के पक्ष में मतदान नहीं किया था। पीड़ित महिलाओं ने मामले की शिकायत बककवंड जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से की है।जनपद सीईओ से की गई शिकायत में ग्राम पंचायत छोटे जीराखाल की फूलबती पिता भगवती जाति भतरा ने बताया है कि वह एक परित्यक्ता और परिवार की एकल महिला सदस्य है। उसका प्रधानमंत्री आवास प्लस 2.0 की सर्वे सूची 2026- 2027 में नाम है और आवास प्लस आईडी सर्वे सूची नंबर 193651893 है। फूलबती एक गरिब परिवार से है। उसे सन 2011 से अब तक आवास नही मिला है। सचिव एवं सरपंच द्वारा कहा गया कि मौजूदा सरपंच के पक्ष में वोट नहीं देने के कारण उसका नाम आवास प्लस 2.0 की पात्रता सूची से नाम काटा जा रहा है। फूलबती ने जनपद सीईओ से इंसाफ की गुहार लगाई है। छोटे जीराखाल ग्राम पंचायत की ही एक अन्य महिला शांति पिता खुरसो कलार ने भी कुछ ऐसा ही आरोप लगाया है। जनपद सीईओ से की गई शिकायत में शांति ने बताया है कि वह परित्यक्ता एकल महिला सदस्य है। प्रधानमंत्री आवास प्लस 2.0 की सर्वे सूची 2026- 2027 में उसका आवास प्लस आईडी सर्वे नंबर 190069574 है। गरिब परिवार से और परित्यक्ता होने के बावजूद उसे 2011 से अब तक आवास नही मिला है। शांति ने भी सचिव और सरपंच पर वोट न देने के कारण सर्वे सूची से नाम काटने का आरोप लगाया है।

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