कफन दफन के नाम पर बार बार उकसाया जा रहा है बस्तर के आदिवासियों को

0 मतांतरित महिला के शव को गांव के श्मशान में दफनाने की जिद 
0 विरोध में उतर आया आदिवासी समुदाय 
(अर्जुन झा) बकावंड। तमाम प्रलोभनों, साम, दाम, दंड, भेद के बावजूद अपने मूल धर्म के प्रति आस्थावान बने रहे बस्तर के आदिवासियों को अब दूसरे तरीके से उकसाने की कोशिशें लगातार की जा रही हैं। कभी कफन दफन के नाम पर, तो कभी पूजा पद्धति को लेकर विवाद की स्थिति पैदा की जा रही है। अब बकावंड विकासखंड के ग्राम उलनार में दो दिन तक ऎसी ही विवाद की स्थिति बनी रही।
दरअसल उलनार गांव के मतांतरित परिवार की 62 वर्षीय महिला लखी कश्यप का तीन दिन पहले निधन हो गया था। परिवार के लोग लखी के शव को गांव के मरघट में दफनाने को लेकर अड़ गए थे। इसी बात पर विवाद शुरू हुआ। दोनों पक्षों में बातचीत के बाद करकापाल स्थित ईसाई कब्रिस्तान में शव दफनाने को लेकर सहमति बन गई है। इस मामले में जानकारी देते हुए थाना प्रभारी नगरनार संतोष सिंह ने बताया कि दोनों पक्षों में अब सहमति बन गई है। शव को करकपाल कब्रिस्तान में ले जाकर दफनाया जाएगा। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश जारी किया है मतांतरितों परिवारों के मृत परिजनों का कफन दफन उनके मौजूदा धर्म के कब्रिस्तान में कराया जाए। इस निर्देश का पालन न कर मतांतरित परिवार जोर जबरदस्ती कर निवास ग्राम के सार्वजनिक मुक्तिधाम में ही शव के अंतिम संस्कार पर अड़ जाते हैं। यह एक तरह से गांव के परंपरागत आदिवासी समुदाय को उकसाने का कृत्य है। एक अकेले उलनार में ही नहीं, बल्कि बस्तर के पचासों गांवों में इसी शव दफनाने के मामले सामने आ चुके हैं और विवाद की स्थिति निर्मित हो चुकी है। आदिवासियों का कहना है कि जो लोग अपने मूल धर्म और संस्कृति को त्याग चुके हैं, वे हमारी आस्था, संस्कृति और परंपरा को आघात पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं प्रशासन कोर्ट के आदेश का पालन न करवा कर मातांतरित लोगों के समर्थन में खड़ा नजर आता है। पूर्व की कांग्रेस सरकारों की तुष्टिकरण नीति ने पुलिस और प्रशासन में इस तरह की भावना कूट कूट कर भर रखी है, जिससे अधिकारी आज तक उबर नहीं पाए हैं। ऐसे मामलों में हर बार बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद तरह उसी ग्राम में दफ्न जैसे हिंदूवादी संगठनों को मूल आदिवासियों के समर्थन में खड़े होना पड़ता है। बताते हैं कि करीब ढाई तीन सौ परिवारों वाले उलनार गांव के लगभग 40 आदिवासी परिवार धर्मांतरित हो चुके हैं।मृतका लखी बाई के पति सदन कश्यप की भी छह दिन पहले निधन हुआ था और उसके शव को गुपचुप तरीके से गांव में ही दफना दिया गया था। इसे लेकर स्थानीय आदिवासी समुदाय में काफी रोष देखने को मिल रहा है। उलनार में विवाद के दौरान सरपंच मधुसूदन नेताम, उपसरपंच देवधन कश्यप, विभाग संयोजक सिकंदर कश्यप, जिला धर्म प्रसार प्रमुख देवेंद्र कश्यप, जिला सत्संग प्रमुख तुलसीराम बघेल, ग्राम पटेल कौड़ीराम पटेल, ग्राम पुजारी लिंगों राम, योगेंद्र, प्रभात कश्यप, कोमाराम भारती, ग्रामसभा अध्यक्ष कृष्ण भारती, जंगल अध्यक्ष श्यामदास बघेल, एवं बजरंग दल उलनार उपखंड के समस्त कार्यकारिणी एवं समस्त ग्रामवासी उपस्थित थे।

बन गई है बात
उलनार गांव के आदिवासी समुदाय और मतांतरित परिवार के बीच सहमति के बाद बात बन गई है। लखी के परिजन उसके शव को करकापाल कब्रिस्तान में दफ़नाने के लिए सहमत हो गए हैं और विवाद खत्म हो गया है।
-संतोष सिंह,
टीआई, नगरनार थाना

पहले भी हुआ था विवाद
कुछ दिन पूर्व मृतका लखी कश्यप के पति सदन कश्यप का निधन हुआ है उस समय भी कुछ विवाद हुआ था, लेकिन उसके शव को ग्राम उलनार में ही दफनाया गया था। लखी कश्यप के शव को दफनाने नहीं देने ग्रामीण लामबंद हो गए थे। अंततः उसे करकापाल के कब्रिस्तान में दफनाने ले जाया गया है।
-मधु नेताम,
सरपंच उलनार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *