रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में उद्योग स्थापना के लिए कथित फर्जी ग्रामसभा प्रस्तावों का मामला जोरदार तरीके से गूंजा। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और संबंधित कंपनियों को आवंटित जमीन निरस्त करने की मांग की। सरकार के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
प्रश्नकाल के दौरान भूपेश बघेल ने ग्राम अल्दा और देवरी-घुलघुल में प्रस्तावित औद्योगिक परियोजनाओं के लिए कथित रूप से फर्जी ग्रामसभा प्रस्ताव तैयार किए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यदि दस्तावेजों में गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए।
जवाब में पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि संबंधित कंपनियों ने अब तक छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल से जल एवं वायु अधिनियम के तहत सहमति (कंसेंट) के लिए आवेदन ही प्रस्तुत नहीं किया है। इस कारण पर्यावरण मंडल को ग्रामसभा के प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुए और पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी।
मंत्री ने सदन को बताया कि ग्राम अल्दा के मामले में जालसाजी की शिकायत मिलने पर त्रि-सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी। जांच में यह तथ्य सामने आया कि ग्रामसभा ने सर्वसम्मति से परियोजना के लिए अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) नहीं देने का निर्णय लिया था। हालांकि, कार्यवाही पंजी में दर्ज अंतिम दो पंक्तियां किसके द्वारा लिखी गईं, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी।
सरकार ने यह भी जानकारी दी कि जांच रिपोर्ट के आधार पर 22 जून 2026 को थाना तिल्दा-नेवरा में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) के तहत अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि संबंधित परियोजनाओं को अभी तक केंद्र सरकार से पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त नहीं हुई है।
भूपेश बघेल ने सरकार से पूछा कि क्या इस मामले में सरपंच, सचिव और अन्य जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी तथा बालाजी स्पंज एंड आयरन लिमिटेड और अग्रसेन स्टील एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड को आवंटित भूमि निरस्त की जाएगी। इस पर मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि मामला पुलिस जांच के अधीन है। विवेचना पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर दोषी व्यक्तियों और संबंधित कंपनियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सरकार के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने इसे अपर्याप्त बताते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।