विधानसभा में बालार्जुन ताम्रपट्टिका पर विवाद: भाषा को लेकर कांग्रेस ने सरकार को घेरा, संस्कृति मंत्री ने जांच का दिया आश्वासन

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में ज्ञान भारतम् अभियान के तहत प्राचीन पांडुलिपियों और ऐतिहासिक ताम्रपत्रों के सत्यापन का मुद्दा चर्चा का विषय बन गया। कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने बिलासपुर जिले के मल्हार से प्राप्त ऐतिहासिक बालार्जुन ताम्रपट्टिका की भाषा और लिपि को लेकर सरकार से सवाल पूछे, जिस पर सदन में तीखी बहस हुई।

प्रश्नकाल के दौरान राघवेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने कार्यक्रम ‘मन की बात’ में इस ऐतिहासिक ताम्रपत्र को ब्राह्मी और पाली भाषा में लिखा हुआ बताया था, जबकि सदन में संस्कृति विभाग की ओर से दिए गए जवाब में इसे पेटिकाशीर्ष ब्राह्मी लिपि और संस्कृत भाषा का बताया गया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की भिन्न जानकारी भ्रम की स्थिति पैदा करती है और सरकार को इस पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

कांग्रेस विधायक ने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारियों द्वारा तैयार की गई जानकारी में विसंगति है, जिसके कारण मंत्री को सदन में गलत जानकारी देनी पड़ी। उन्होंने मांग की कि यदि अधिकारियों की ओर से तथ्यात्मक त्रुटि हुई है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

इस पर संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि यदि जांच में यह पाया जाता है कि किसी अधिकारी ने तथ्यात्मक त्रुटि या गलत जानकारी प्रस्तुत की है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

मंत्री ने अपने जवाब में बताया कि ज्ञान भारतम् अभियान के तहत छत्तीसगढ़ से मोबाइल ऐप के माध्यम से 1,24,422 पांडुलिपियों का पंजीयन किया गया था। इनमें से 12,040 पांडुलिपियों का ज्ञान भारतम् केंद्र, नई दिल्ली द्वारा सत्यापन किया जा चुका है, जबकि 1,12,382 पांडुलिपियां तकनीकी अथवा अन्य कारणों से अस्वीकृत हुई हैं।

संस्कृति मंत्री ने यह भी बताया कि बिलासपुर जिले के मस्तूरी क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक स्थल मल्हार से प्राप्त प्रसिद्ध बालार्जुन ताम्रपट्टिका की खोज वर्ष 1987 में हुई थी। विभागीय अभिलेखों के अनुसार इसकी लिपि पेटिकाशीर्ष ब्राह्मी तथा भाषा संस्कृत है। वर्तमान में यह ताम्रपट्टिका मल्हार निवासी संजीव पाण्डेय के संरक्षण में सुरक्षित है। भाषा और लिपि को लेकर सदन में उठे इस मुद्दे के बाद सरकार ने संबंधित तथ्यों की जांच कराने और आवश्यक होने पर जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई का आश्वासन दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *