अबूझमाड़ की अनमोल “रत्ना” का राष्ट्रपति भवन में सम्मान

0 सेवा, समर्पण और सामाजिक परिवर्तन की मिसाल बनी डॉ. रत्ना 
0 डॉ. नाशिने को ‘माई एफसी भारत, राष्ट्रीय सेवा योजना राष्ट्रीय पुरस्कार 
जगदलपुर। जब किसी आदिवासी परिवार के चेहरे पर मुस्कान आती है, किसी किसान की आय बढ़ती है, कोई युवा समाज सेवा को अपना जीवन लक्ष्य बनाता है, तब वही मेरे लिए सबसे बड़ा सम्मान होता है। यह कहना है डॉ. रत्ना नाशिने का। डॉ. रत्ना बस्तर की वो शख्सियत हैं, जिन्हें राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति के हाथों माय एफसी भारत एनएसएस राष्ट्रीय सम्मान मिला है।
बस्तर संभाग के नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ अंचल के एक छोटे से आदिवासी गांव में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के स्वयंसेवक ग्रामीणों के साथ मिलकर स्वच्छता अभियान चला रहे हैं। कहीं महिलाएं पोषण वाटिका तैयार कर रही हैं, कहीं किसान जैविक खेती का प्रशिक्षण ले रहे हैं, तो कहीं युवा सड़क सुरक्षा और नशामुक्ति का संदेश दे रहे हैं। इन सबके बीच एक सरल, सौम्य और कर्मठ व्यक्तित्व हर गतिविधि पर समान आत्मीयता से नजर रखता है। यह व्यक्तित्व है डॉ. रत्ना नशीने, जिनके लिए सेवा केवल दायित्व नहीं, बल्कि जीवन की सर्वोच्च साधना है। वर्षों पहले शुरू हुई यह सेवा यात्रा आज देश के सर्वोच्च मंच तक पहुंच चुकी है। नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने डॉ. रत्ना नाशिने को वर्ष 2022-23 के “माई भारत-राष्ट्रीय सेवा योजना राष्ट्रीय पुरस्कार” से सम्मानित किया। युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला यह सम्मान समाज सेवा, युवा नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रदान किया जाता है।
इस उपलब्धि के साथ लिंगो मुदियाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, नारायणपुर को 2.50 रुपए लाख तथा डॉ. रत्ना नाशिने को व्यक्तिगत रूप से 1.50 लाख रुपए की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर अंचल की सेवा भावना का राष्ट्रीय सम्मान है। डॉ. रत्ना नाशिने का मानना है कि शिक्षा तभी सार्थक है, जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। इसी सोच के साथ उन्होंने राष्ट्रीय सेवा योजना को केवल महाविद्यालय तक सीमित न रखकर गांव-गांव तक पहुंचाया। नारायणपुर और ओरछा अबूझमाड़ के दुर्गम आदिवासी क्षेत्रों में उन्होंने एनएसएस स्वयंसेवकों के साथ मिलकर स्वच्छता, रक्तदान, स्वास्थ्य जागरूकता, जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, मतदाता जागरूकता, सड़क सुरक्षा, नशामुक्ति, माई भारत अभियान, हर घर तिरंगा और ग्राम विकास जैसे अनेक अभियान संचालित किए। इन प्रयासों से हजारों ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया और युवाओं में समाज सेवा के प्रति नई चेतना विकसित हुई।
हरियाली, आत्मनिर्भरता और नई उम्मीद पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने के उद्देश्य से एनएसएस इकाई ने 36 हजार 421 पौधों का रोपण किया तथा 48 हजार से अधिक सीड बॉल्स दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में वितरित किए। प्लास्टिक मुक्त गांव और स्वच्छता अभियान ने ग्रामीणों में पर्यावरण के प्रति नई जिम्मेदारी का भाव जगाया।

जैविक खेती को बढ़ावा
एक कृषि वैज्ञानिक के रूप में डॉ. नाशिने ने आदिवासी किसानों को जैविक खेती, प्राकृतिक कृषि, वर्मी कम्पोस्ट, पोषण वाटिका, मूल्य संवर्धन और आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण दिया। उनके मार्गदर्शन में 3 हजार से अधिक किसान विभिन्न शासकीय योजनाओं से जुड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़े। ग्रामीण क्षेत्रों में 39 सौर पंपों की स्थापना से सिंचाई और कृषि उत्पादन को नई गति मिली। डॉ. नाशिने का विश्वास है कि जब महिला सशक्त होती है, तभी परिवार और समाज सशक्त होता है। इसी सोच के साथ उन्होंने स्वयं सहायता समूहों को स्वरोजगार, वर्मी कम्पोस्ट, डिजिटल साक्षरता, कैशलेस लेन-देन, पोषण, उद्यमिता और कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया। आज अनेक महिलाएं स्वयं आय अर्जित कर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं।
संकट के दौर भी नहीं रुकी सेवा
कोविड-19 महामारी के दौरान जब पूरा देश संकट से जूझ रहा था, तब डॉ. रत्ना नाशिने ने हेल्थ वर्कर के रूप में जिला प्रशासन के साथ सुदूर आदिवासी क्षेत्रों में जाकर टीकाकरण के प्रति जागरूकता फैलाई, भ्रांतियों को दूर किया तथा 12 हजार से अधिक मास्क ग्रामीणों को वितरित किए। उनकी यह सेवा भावना समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का जीवंत उदाहरण है।
युवा बने राष्ट्र निर्माण का आधार
डॉ. नाशिने ने राष्ट्रीय सेवा योजना के माध्यम से हजारों युवाओं को केवल स्वयंसेवक नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक बनाया। सड़क सुरक्षा अभियान में नुक्कड़ नाटक, गीत, रैलियों और जनसंवाद के माध्यम से लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया गया। नशामुक्ति अभियान के अंतर्गत युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराया गया तथा उनके प्रयासों से संस्थान को तंबाकू मुक्त परिसर घोषित किया गया।डॉ. रत्ना नाशिने को अब तक 7 अंतरराष्ट्रीय, 26 राष्ट्रीय, 7 राज्य स्तरीय और 5 जिला स्तरीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। उन्हें राज्य स्तरीय श्रेष्ठ एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी (2021-22) सम्मान से भी नवाजा गया। किंतु वे अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि उन मुस्कुराते चेहरों को मानती हैं, जिनके जीवन में शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और आत्मविश्वास का नया उजाला पहुंचा।

प्रेरणा की जीवंत मिसाल हैं रत्ना
पूर्व में घोर नक्सल प्रभावित रहे नारायणपुर और अबूझमाड़ जैसे दुर्गम आदिवासी क्षेत्रों में वर्षों तक निरंतर सेवा करते हुए डॉ. रत्ना नाशिने ने यह सिद्ध किया है कि विकास केवल योजनाओं से नहीं, बल्कि संवेदनशील नेतृत्व, जनभागीदारी और समर्पित प्रयासों से संभव होता है। उन्होंने शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और युवा जागरूकता के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन की सशक्त पहल की। उनकी प्रेरक यात्रा यह संदेश देती है कि कठिन से कठिन परिस्थितियाँ भी सेवा, समर्पण और दृढ़ संकल्प के मार्ग में बाधा नहीं बन सकतीं। आज डॉ. रत्ना नाशिने केवल एक कृषि वैज्ञानिक या शिक्षाविद् नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सेवा संस्कृति, महिला नेतृत्व और युवा शक्ति की सशक्त पहचान बन चुकी हैं। राष्ट्रपति भवन में प्राप्त राष्ट्रीय सम्मान उनके कार्यों की राष्ट्रीय स्वीकृति है, जबकि नारायणपुर और अबूझमाड़ के लोगों के चेहरे पर दिखाई देने वाली मुस्कान उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
डॉ. रत्ना नाशिने की प्रेरक यात्रा हमें यह विश्वास दिलाती है कि जब सेवा जीवन का उद्देश्य बन जाती है, तब परिवर्तन इतिहास बन जाता है।

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