रायपुर। राजधानी रायपुर के माना क्षेत्र स्थित नकटी गांव सोमवार सुबह प्रशासनिक कार्रवाई का केंद्र बन गया। प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के लिए भूमि खाली कराने पहुंचे प्रशासन ने भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बड़े पैमाने पर बेदखली अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान करीब 80 मकानों को हटाया गया, जिनमें प्रधानमंत्री आवास योजना और इंदिरा आवास योजना के तहत निर्मित 32 मकान भी शामिल बताए जा रहे हैं। अभियान के दौरान ग्रामीणों और पुलिस के बीच तीखा विरोध, धक्का-मुक्की और नारेबाजी देखने को मिली।
संभावित विरोध को देखते हुए प्रशासन ने रविवार रात से ही गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया था। क्षेत्र में एक हजार से अधिक पुलिस जवानों की तैनाती की गई थी। सोमवार सुबह जैसे ही जेसीबी मशीनें गांव में पहुंचीं, कई ग्रामीण अपने घरों के सामने खड़े होकर कार्रवाई का विरोध करने लगे। कुछ महिलाएं और बुजुर्ग मशीनों के सामने बैठ गए, जबकि कई लोगों ने मकान तोड़ने से रोकने का प्रयास किया। पुलिस ने उन्हें हटाकर कार्रवाई आगे बढ़ाई।
बेदखली अभियान के दौरान कई भावुक दृश्य भी सामने आए। जिन परिवारों के घर तोड़े गए, वे अपना घरेलू सामान सड़क किनारे निकालकर बैठे नजर आए। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के चेहरों पर भविष्य की चिंता साफ दिखाई दे रही थी। कई लोग मलबे के बीच अपने सामान को समेटते रहे, जबकि कुछ परिवार अपने टूटते आशियाने को देखकर भावुक हो गए। पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं को भी सामने ला दिया।
जिला प्रशासन का कहना है कि प्रभावित परिवारों को बिना पुनर्वास के नहीं छोड़ा जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक कुल 75 प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इनके लिए नया रायपुर के सेक्टर-30 स्थित आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) आवासों में मकानों का आवंटन किया जा रहा है। प्रशासन का दावा है कि प्रभावित लोगों को अस्थायी राहत के साथ स्थायी आवास उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
प्रशासन के अनुसार जिस भूमि पर मकान बने थे, वह शासकीय भूमि है और वर्षों से उस पर अवैध कब्जा किया गया था। अधिकारियों का कहना है कि नियमानुसार पहले नोटिस जारी किए गए, लोगों को निर्धारित समय दिया गया और उसके बाद ही बेदखली की कार्रवाई की गई। प्रशासन का दावा है कि पूरी प्रक्रिया कानूनी प्रावधानों के अनुरूप पूरी की गई है।
हालांकि ग्रामीण प्रशासन के इस दावे से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि वे दशकों से इसी गांव में रह रहे हैं और संबंधित भूमि गांव की आबादी का हिस्सा है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार ने पहले इन्हीं भूखंडों पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान निर्माण के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की और अब उसी जमीन को शासकीय बताते हुए उन्हें बेदखल किया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि भूमि अवैध थी तो पहले सरकारी योजनाओं के तहत मकानों का निर्माण कैसे कराया गया।
ग्रामीणों के अनुसार वार्ड 16 और 17 में रहने वाले करीब 48 परिवार लंबे समय से इस क्षेत्र में निवास कर रहे हैं। उनका कहना है कि बिना पर्याप्त पुनर्वास, मुआवजे और सभी पक्षों की सहमति के इस तरह की कार्रवाई सामाजिक और मानवीय दृष्टि से उचित नहीं है। कई ग्रामीणों ने यह भी कहा कि वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आगे भी कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे।
स्थानीय लोगों ने पिछले वर्ष की घटना का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि तब भी प्रशासन ने इसी प्रकार की कार्रवाई का प्रयास किया था, लेकिन ग्रामीणों के विरोध और जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बाद अभियान रोक दिया गया था। इस बार प्रशासन ने पहले से अधिक सुरक्षा बल के साथ कार्रवाई की, जिससे विरोध के बावजूद अभियान पूरा किया जा सका।
गौरतलब है कि विधानसभा के बजट सत्र के दौरान विधायकों के लिए नए आवासीय परिसर के निर्माण का मुद्दा सामने आया था। इसके बाद नकटी गांव की भूमि को प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के लिए चिन्हित करने की प्रक्रिया तेज हुई। इसी योजना के तहत प्रशासन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई कर रहा है।
फिलहाल नकटी गांव में स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। क्षेत्र में पुलिस बल तैनात है और प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है। एक ओर सरकार पुनर्वास की व्यवस्था का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण अपने पुश्तैनी आशियाने और अधिकारों की रक्षा के लिए विरोध पर कायम हैं। ऐसे में यह मामला अब केवल बेदखली तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पुनर्वास, भूमि अधिकार और विकास परियोजनाओं के बीच संतुलन की चुनौती के रूप में भी देखा जा रहा है।