० पत्र सूचना कार्यालय ने किया जगदलपुर में विशेष संवाद कार्यशाला का आयोजन
जगदलपुर। भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) रायपुर द्वारा आज जगदलपुर में विशेष मीडिया संवाद कार्यशाला वार्तालाप का आयोजन किया गया। “सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण के 12 वर्ष: नक्सलवाद से विकास और विश्वास की ओर बढ़ता बस्तर” के मुख्य विषय पर केंद्रित यह कार्यशाला क्षेत्र में हुए परिवर्तनकारी सामाजिक-आर्थिक बदलावों पर चर्चा करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुई। इस संगोष्ठी में विस्तार से बताया गया कि कैसे पिछले 12 वर्षों की लक्षित कल्याणकारी नीतियों ने बस्तर को वामपंथी उग्रवाद के साए से सफलतापूर्वक बाहर निकाला है। कार्यशाला को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने पिछले 12 वर्षों में केंद्र सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं और उपलब्धियों का एक लेखा-जोखा साझा किया। उन्होंने रेखांकित किया कि बस्तर जैसे सुदूर क्षेत्रों के सतत परिवर्तन के लिए शिक्षा और विकास दो सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ बने हुए हैं। मंत्री ने कहा कि सुशासन की संकल्पना तब तक अधूरी है जब तक कि शिक्षा का प्रकाश बस्तर के सुदूर कोनों तक नहीं पहुंच जाता और हर नागरिक विकास की मुख्यधारा से नहीं जुड़ जाता। सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के सांख्यिकीय मील के पत्थरों को प्रस्तुत करते हुए श्री साहू ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे इन पहलों ने देश और बस्तर क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को समान रूप से पुनर्जीवित किया है। केंद्रीय राज्य मंत्री श्री साहू ने बुनियादी ढांचे और बुनियादी जरूरतों से जुड़ी योजनाओं पर भी प्रकाश डाला। श्री साहू ने कृषि और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत के बढ़ते वैश्विक कदमों की ओर भी इशारा किया और कहा कि भारत दुनिया में मोटे अनाज (मिलेट्स) का सबसे बड़ा उत्पादक देश बनकर उभरा है। जिसका सीधा लाभ बस्तर के उन आदिवासी किसानों को मिल रहा है जो कोदो-कुटकी और रागी जैसी पारंपरिक फसलों की खेती करते हैं।
आदिवासियों का हो समग्र उत्थान: कश्यप
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बस्तर के सांसद महेश कश्यप ने क्षेत्र के बदलते स्वरूप और इसकी आदिवासी आबादी के समग्र उत्थान पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बस्तर आज नक्सलवाद के खौफ से मुक्त होकर प्रगति का एक नया अध्याय लिख रहा है। उन्होंने आदिवासी सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करने, सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देने और मजबूत सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार की पूर्ण प्रतिबद्धता को दोहराया। वनधन केंद्रों, एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों के विस्तार और मुख्य बुनियादी ढांचे के विकास के माध्यम से, सतत विकास का एक ऐसा मॉडल स्थापित किया जा रहा है जिससे आदिवासी समुदाय सुरक्षित, आत्मनिर्भर और सशक्त महसूस कर सके।कार्यशाला के दौरान जगदलपुर नगर निगम के महापौर संजय पाण्डे, जिला कलेक्टर आकाश छिकारा, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा और जिला पंचायत के सीईओ प्रतीक जैन ने सहभागिता की। कार्यक्रम में अंदरूनी इलाकों में सड़कों के विस्तार, नए स्कूलों की स्थापना और सुरक्षा शिविरों जैसे विषयों पर चर्चा हुई। पीआईबी रायपुर के अधिकारियों ने ‘वार्तालाप’ के मूल उद्देश्य को सारांशित करते हुए मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बताया, जो समाज के अंतिम व्यक्ति तक कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाने में एक अनिवार्य भूमिका निभाता है।