15वें वित्त मद से करोड़ों का बोर घोटाला..?

०  300 फीट की जगह कराए महज बजाय 70 से 80 फीट तक बोर 
०  आधे से भी अधिक हैंडपंप हो गए नकारा
०  कहीं हैंडपंप खराब, कहीं निकल रहा गंदा पानी
(अर्जुन झा) जगदलपुर। ग्राम पंचायतों को केंद्रीय मद से मिलने वाली 15वें वित्त की राशि की बस्तर संभाग में किस कदर बंदरबांट की जाती है, इसका बड़ा उदाहरण संभाग के बीजापुर जिले से सामने आया है। इस जिले के चार विकासखंडों की 170 ग्राम पंचायतों में 15वें वित्त मद से लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के नाम पर वर्ष 2025-2026 में लगभग 300 बोर खनन का कार्य कराया गया है। इस कार्य में कमीशनखोरी का खेल ऐसा चला कि 300 फीट तक बोर न कराकर महज 70-80 फीट की गहराई तक ही बोर करा दिए गए।
जनपद पंचायतों के अधिकारियों की कमीशनबाजी के चलते अधिकांश बोर किसी काम के नहीं रह गए हैं। जो बोर चालू हालत में हैं, उनमें से गंदा पानी निकल रहा है। शासन के मापदंडों के अनुसार लगभग 300 फीट गहराई तक खनन कार्य कर हैण्डपंप लगाने का प्रावधान है। ठेकेदार एवं अधिकारियों की सांठगांठ के कारण 60 से 80 फीट उत्खनन कराकर हैंडपंप लगा दिए गए हैं। हैण्डपंप 8 से 10 माह में ही जवाब दे गए। इन सभी बोर की जांच कराई जाए तो जनहित से जुड़ा एक बड़ा घोटाला उजागर हो सकता है। बीजापुर की तरह ही सुकमा जिले में भी कुछ ऐसा ही हुआ है। बोरिंग ठेकेदार सुकमा में लाखों के वारे-न्यारे करने के बाद बीजापुर जिले के पंचायतों में भी कुछ ऐसा ही चल रहा है और विभाग कमीशन के लालच में बेखबर है। ज्ञातव्य हो कि बीजापुर जिले के बीजापुर, भैरमगढ़, भोपालपट्नम एवं उसूर विकासखंडों की विभिन्न ग्राम पंचायतों में बोर कराने के नाम पर 15वें वित्त मद की राशि की जमकर बंदरबांट कर ग्रामीणों को पेयजल जैसी सुविधा से वंचित रखा जा रहा है। विगत एक वर्ष में हैंडपंप स्थापना के लिए कराए गए बोर में से 75 फीसदी बोर किसी काम के नहीं रह गए हैं। इन बोरों में हैंडपंप तो लगा दिए गए हैं और उनकी पूरी राशि का भुगतान पंचायत स्तर से की गई है। इस फर्जीवाड़े में कमीशन जनपद से लेकर जिला पंचायत एवं ठेकेदार तक में बंटा है। पंचायत सचिव व ठेकेदार की साठगांठ कार्यालय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार निर्धारित मापदण्ड से कम उत्खनन किए जाने के कारण अधिकांश बोर खराब हो चुके हैं।

इन पंचायतों में हुआ खेल
इन विकासखंडों की पंचायतों में जांच कराई जाए तो सत्यता उजागर हो सकती है। जिसमें उसूर विकासखंड के मारूदबाका, धरमारास, लंकापल्ली, तरेंम, बीजापुर विकासखण्ड के मिड़ते, पेदाकोड़ेपाल, पीडिया, मेटापाल, भोपालपट्नम विकासखंड के बेगापल्ली, गोटाईगुड़ा, चेरपल्ली, गुन्लापेंटा, भैरमगढ़ विकासखंड के पातरपारा, अंबेली, माटवाड़ा, पिटेपाल सहित अन्य पचांयतों के विभिन्न पाराओं में बोर कराया गया है इसकी जांच हुई तो ठेकेदार की लायसेंस निरस्त भी किया जा सकता है। बोर खनन को लेकर जिले के कई सरपंचों से चर्चा करने पर अधिकांश सरपंचों के भुगतान के संबंध में जानकारी नहीं होने की बात कही। सरपंच ने बताया कि अधिकांश हैंडपंपों से कम पानी निकलता है तो कई खराब पड़े हैं। कई पंचायत सचिवों ने गोलमोल जवाब देते हुए पंचायत से भुगतान किए जाने को लेकर पल्ला झाड़ते लिया और कहा कि हैण्डपंप उत्खनन का भुगतान जनपद से किया जा रहा है।

50 फीसदी राशि की बंदरबांट
पंचायतों में पेयजल उपलब्ध कराने को लेकर शासन द्वारा प्रत्येक बोर खनन के नाम पर एक लाख 40 हजार की राशि दी जाती है, लेकिन ठेकेदार 50 फीसदी से कम खनन कर आधी से अधिक राशि की बंदरबांट कर ली गई है। सुकमा जिले की पंचायतों में उक्त ठेकेदार द्वारा कुछ ऐसा ही कारनामा किया गया था। अब वहीं ठेकेदार बीजापुर में शासन को चपत लगाकर ग्रामीणों को पेयजल से वंचित कर रहा है। जिले के अधिकारी भी मामले का संज्ञान लाने पर जांच के लिए लिखित शिकायत का इंतजार किया करते हैं।

करें लिखित शिकायत मौखिक बताने पर क्या जांच की जा सकती है। लिखित शिकायत करें, मामले की जांच कराई जाएगी।
-नम्रता चौबे,
सीईओ, जिला पंचायत, बीजापुर

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