रायपुर। आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया के दावों पर सवाल उठाते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि मोदी सरकार का नया टैक्स मॉडल घरेलू कंपनियों के आर्थिक हितों के खिलाफ है। केंद्र सरकार ने अमेरिकी दबाव में विदेशी क्लाउड कंपनियों को साल 2047 तक इनकम टैक्स में भारी छूट दी है, जबकि स्वदेशी कंपनियों को कुछ भी अतिरिक्त रियायत नहीं है। स्वदेशी कंपनियों को टैक्स छूट नहीं मिलना संविधान के समता और समानता के अधिकार का उल्लंघन है। यही नहीं विदेशी कंपनियों को भारत में लागू कानून से आज़ादी के लिए ही दुर्भावनापूर्वक इन कंपनियों को भारत में स्थायी ऑफिस बनाने की कोई बाध्यता नहीं रखी गई है, मतलब न हमारे श्रम कानून लागू होंगे, न दीर्घकालिक रोज़गार मिलेगा। मोदी सरकार की नीतियां देश के स्थानीय कंपनियों के खिलाफ है, मेक इन इंडिया केवल जुमला है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि देश के 81 करोड़ जनता को गरीबी रेखा से नीचे पहुंचा कर 5 किलो राशन की लाईन में खड़ा कर दिया गया है। देश के 60 करोड़ लोग पेयजल जल संकट में जीने मजबूर हैं, बिजली कटौती आम जनता झेल रही है, लेकिन 2047 तक कर सब्सिडी, करोड़ों गैलन पानी और असीमित बिजली पीने वाले इन विदेशी डेटा सेंटर्स के लिए यह सरकार देश के सारे संसाधन लुटा रही है। दुनिया का 25 प्रतिशत डेटा हम जनरेट कर रहे हैं, लेकिन सरकार की अकर्मण्यता और विदेश नीति की असफलता से सुरक्षा कानून न होने के कारण अमेरिकी टेक कंपनियाँ मालामाल हो रही हैं। विदेशी कंपनियों को हमारे पानी, बिजली और टैक्स की बलि देकर मुनाफ़ा कमाने देना ही भाजपा सरकार की ‘‘आत्मनिर्भरता’’ है?
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि हमारे आम बजट में सिर्फ एक साल के लिए टैक्स के नियम बनाये जाते है लेकिन अमेरिका के दबाव में विदेशी क्लाउड कंपनियों को साल 2047 तक इंकम टैक्स में छूट क्यों और किस आधार पर दी गयी? देश की आम जनता और देश की कंपनियों के आगामी वर्षों के लिए हर साल बजट प्रावधान में इनकम टैक्स की दरें तय की जाती है, कर का स्लैब हर साल घोषित होता है, लेकिन इन विदेशी क्लाउड और एआई (AI) सेवा प्रदाता कंपनियों को 2047 तक कर (टैक्स) में विशेष छूट दी गई है, मोदी सरकार ने अव्यवहारिक निर्णय के बाद अब तक जो विदेशी कंपनियों को भारत में उनकी सामान्य व्यावसायिक आय (Permanent Establishment) पर 35 प्रतिशत का बेस रेट और लागू अधिभार (Surcharge) व उपकर (Cess) के साथ लगभग 36.4 प्रतिशत से 38.2 प्रतिशत तक का प्रभावी कॉर्पोरेट टैक्स लगता था, वह अब इन कंपनियों को नहीं लगेगा, यही नहीं विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) को सरकारी बॉन्ड या कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग वेयरहाउसिंग में भी कुछ अन्य विशेष छूट दी गई हैं। मोदी सरकार की सारी राहत, रियायत और सब्सिडी प्राथमिकता से विदेशी कंपनियों को मिल रही है, स्थानीय लोगों से बेरहमी से टैक्स वसूला जा रहा है, ट्रंप के आगे समर्पण मुद्रा में है यह सरकार।