० राजस्व विभाग के दल ने गिरफ्तार की मांग को लेकर सौंपा कलेक्टर को ज्ञापन
बकावंड। करपावंड के विवादित सरपंच लखमू राम नेताम के काले कारनामों की परतें खुलने लगी हैं। ग्रामीणों ने सरपंच पर जलकर की राशि का गबन करने सहित अन्य कई मामलों में सरपंच को हटाने की मांग उठने लगी है। वहीं राजस्व विभाग की टीम ने बस्तर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मारपीट करने वाला सरपंच को गिरफ्तार करने की मांग की है। ज्ञात हो कि 19 जून को राजस्व एवं पुलिस विभाग की टीम पर हमला करने वाला भाजपा सरपंच फिलहाल फरार है जिसकी गिरफ्तारी एवं उसे पद से हटाने की मांग उठने लगी है। सरपंच आए दिन बैठक कर ग्रामीणों को भड़काने में जुटा है। जिससे तनाव का माहौल बना हुआ है। जानकारी के अनुसार करपावण्ड में 170 घरों में नल कनेक्शन लगाए गए हैं प्रत्येक घर से जल कर के रूप में 150 रूपये की दर से जल कर की वसूली की जाती है। सरपंच द्वारा 19 माह के जल कर की वसूली की गई है जिसकी जानकारी सचिव को भी नहीं है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि 18 माह में लगभग 4 लाख से अधिक की राशि वसूली की गई है, लेकिन सरपंच एवं पंच द्वारा 60 हजार की ही वसूली की जानकारी दी जा रही है। उसमें 40 हजार खर्च होना बताया गया है। जबकि नियमों के अनुसार कर की राशि पंचायत के खातें में जमा करने के बाद वहां से खर्च करने का प्रावधान है। प्रेसवार्ता में ग्रामीण प्रतिनिधियों ने सरपंच पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें तत्काल पद से हटाने की मांग की।
ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच के कार्यकाल में गांव में विवाद, तनाव और प्रशासनिक टकराव की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे पंचायत का सामान्य कामकाज प्रभावित हुआ है।प्रेसवार्ता में पूर्व सरंपच पति कामता प्रसाद कोर्राम ने बताया कि 19 जून को राजस्व मंडल के आदेश के पालन में तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, पटवारी और अन्य अधिकारी पुलिस बल की मौजूदगी में सीमांकन और नापजोख की कार्रवाई कर रहे थे। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इसी दौरान सरपंच मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को एकत्र कर कार्रवाई का विरोध कराया। उनका दावा है कि स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि अधिकारियों को सुरक्षा घेरे में रहकर कार्य करना पड़ा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पंचायत क्षेत्र में न्यायालय से स्थगन आदेश मिलने के बावजूद कुछ दुकानों को तोड़ा गया। इसके अलावा जलकर वसूली, पंचायत प्रशासन में कथित मनमानी, वन भूमि पट्टा और शासकीय भूमि से जुड़े मामलों को लेकर भी सवाल उठाए गए। उनका कहना है कि इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। ग्रामीणों ने कहा कि सरपंच गांव के विकास और सामाजिक समरसता का प्रतीक होता है, लेकिन यदि उसके कार्यों से लगातार विवाद उत्पन्न हो रहे हैं तो प्रशासन को हस्तक्षेप करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंचायत व्यवस्था में लोगों का विश्वास बनाए रखने के लिए निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई जरूरी है। जलकर मामले में सरपंच से प्रतिक्रिया लेना चाहा तो उनसे संपर्क नहीं होने के कारण प्रतिक्रिया नहीं लिया जा सका।
सरपंच को जारी होगा नोटिस
एसडीएम मनीष वर्मा ने बताया कि जलकर वसूली में भारी अनियमितता बरती गई है। जलकर वसूली राशि को सरपंच ने अपने पास रखा है जो नियमों के विपरीत है। उन्होंने बताया कि सचिव का बयान दर्ज किया जा चुका है। सरपंच को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।