भाजपा सरकार स्कूलों को आरएसएस की शाखा में परिवर्तित करना चाह रही – कांग्रेस

0 स्कूलों में विभिन्न मंत्रों के वाचन की अनिवार्यता संविधान के खिलाफ

0 दूसरे धर्मों के लोग अपनी पूजा पद्धति भी पढ़ाने की मांग करेंगे तो कैसे होगा?

रायपुर। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि भाजपा सरकार स्कूलों को आरएसएस की शाखा में परिवर्तित करना चाह रही। भाजपा सरकार द्वारा स्कूलों में सुबह दीप मंत्र, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र, मध्यान्ह में भोजन मंत्र, शाम को छुट्टी होने पर गायत्री मंत्र एवं शांति मंत्र का वाचन बच्चों से कराया जाना संविधान के खिलाफ है।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि संविधान के

अनुच्छेद 28(1) का संदर्भः भारतीय संविधान के अनुच्छेद 28(1) के तहत पूर्णतः राज्य-निधि से संचालित (सरकारी) शिक्षण संस्थानों में किसी भी प्रकार की धार्मिक शिक्षा या विशिष्ट धार्मिक प्रार्थना आयोजित नहीं की जा सकती।

अनुच्छेद 28(3) एवं धार्मिक स्वतंत्रता: राज्य से मान्यता या सहायता प्राप्त निजी विद्यालयों में किसी भी छात्र को उसकी या उसके अभिभावकों की सहमति के बिना किसी धार्मिक प्रार्थना में भाग लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। आदेश में ‘‘आयोजित किया जाना सुनिश्चित करें’’ शब्दावली से इसे अनिवार्य बनाने का आभास होता है, जो छात्रों के मौलिक अधिकारों (अनुच्छेद 25) का उल्लंघन कर सकता है।

अल्पसंख्यक एवं अन्य समुदायः शासकीय और अर्ध-शासकीय शालाओं में विभिन्न धर्मों, पंथों और पृष्ठभूमि के छात्र अध्ययनरत हैं। किसी विशिष्ट पद्धति की प्रार्थनाओं की अनिवार्य करने से धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों पर प्रभाव पड़ता है।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि सरकारी स्कूलों में मंत्राचार को अनिवार्य करने से दूसरे धर्म के लोगों को ठेस पहुंचेगी। ऐसे में मुस्लिम धर्म के लोग कुरान की आयात तथा सिख धर्म के लोग गुरुवाणी तथा ईसाई धर्म के लोग बाइबल के अंशों को भी वाचन करने की मांग करेंगे। सभी धर्मों में हर दैनिक कार्य के लिए अलग-अलग धार्मिक व्यवस्थायें है। सभी धर्मों के लोग चाहेंगे कि उनकी धार्मिक पूजा पद्धति का अनुसरण हो तब सरकार क्या करेगी? सनातन परंपरा को गैर सनातनियों के बच्चे क्यों माने? उन्हें क्यों बाध्य किया जाए?

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि सरकार शिक्षा को शिक्षा ही रहने दे उसे धार्मिक सांचे में ढालने का प्रयास मत करे। शिक्षा में वैज्ञानिकता एवं आधुनिकता का नवाचार को निश्चित तौर पर बच्चों में सदाचार एवं संस्कार की शिक्षा डालनी चाहिए लेकिन उनके पारिवारिक एवं सामाजिक संस्कारों के खिलाफ कुछ भी थोपा जाना उचित नहीं होगा। सरकार परस्पर विद्वेष फैलाने का प्रयास मत करे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *