मानसून की आहट, जलभराव की आशंका, सिकुड़ते नाले, कचरों से पैक नालियां, जिम्मेदार आंखें मूंदे बैठे हैं – सुरेंद्र वर्मा

0 निचले इलाकों और अंडर पास ही नहीं मुख्य सड़कों पर भी चुनौती, आधे घंटे की बारिश में ही आधा शहर हो जाता है जलमग्न

रायपुर। राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के शहरों में जलभराव और जल निकासी की समस्या के चिन्हित स्थलों पर सरकार से त्वरित कार्यवाही करने की मांग करते हैं प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि मानसून सीजन शुरू होने को है लेकिन अब तक नालियों और नालों की समुचित सफाई तक नहीं हो पाई है, मोवा, सड्डू नाला, भनपुरी, प्रोफेशर कॉलोनी, राजातालाब, न्यू शांति नगर गोरखा कॉलोनी सहित शहर के कई प्रमुख नाले अतिक्रमण के चपेट में आकर सिकुड़ गए हैं, ट्रिपल इंजन सरकार के संरक्षण में बिल्डर नालों को पाट कर अपनी सुविधा के लिए उपयोग कर रहे हैं। नगर निगम अमले के द्वारा कई इलाकों में नालों के पाटे तोड़कर मलमा वहीं रख दिया गया है, ऐसे में बारिश आने से ये मलमा वापस नालियों में भर जायेगा। राजधानी रायपुर के ज्यादातर हिस्सों की हालात यह है कि 10 मिनट की बारिश में ही कई निचले इलाकों, अंडरपास और मुख्य सड़कों पर चुनौती बन जाती है। घरों में पानी भर जाने से जीना मुश्किल हो जाता है, लेकिन इस सरकार के नगरीय प्रशासन और नगर निगम का रवैया शुतुरमुर्ग की तरह है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि शहर में जलभराव के मुख्य कारण सरकार और प्रशासन की अकर्मण्यता है। मुख्य नालों में अवैध कब्जा हो रहे हैं, जिसके चलते नालों की चौड़ाई घटते जा रही है, भू माफियाओं और अवैध कब्जाधारियों को इस सरकार का संरक्षण है, बड़े बिल्डर बेखौफ होकर नाले नालियां पाट रहे हैं, नालियों और नालों की समुचित सफाई तक नहीं हो पा रही है, जिम्मेदार आँखे मूंदे बैठे हैं।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि सरकार नगरीय निकायों में सभी निचले इलाको में, जहाँ बारिश का पानी निकल नहीं पाता है, वहाँ पर तत्काल नालों का निरीक्षण कर सफाई और चौड़ीकरण सुनिश्चित करें, नगर निगम और प्रशासन मॉनसून से पहले प्रमुख नालों और नालियों की व्यापक स्तर पर सफाई और गाद निकालने का अभियान चलाए ताकि पानी की निकासी बाधित न हो। जलभराव से प्रभावित होने वाली कॉलोनियों और सड़कों की पहचान कर अतिरिक्त पंप और टीमें तैनात करे। आपदा की स्थिति में त्वरित बचाव कार्य और जल निकासी के लिए फुल-प्रूफ प्लान तैयार रखे। शिकायत दर्ज करने स्पेशल सेल का गठन किया जाए, ताकि समस्याओं के त्वरित समाधान हो सके।

 

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