० किसानी और आस्था का सम्मान नहीं हुआ तो करेंगे उग्र आंदोलन
जगदलपुर। बस्तर जिले की ग्राम पंचायत चपका में मेसर्स गोपाल स्पंज एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा आयरन उद्योग लगाए जाने के खिलाफ किसान और आदिवासी संगठन एकजुट हो गए हैं। 11 जून को आयोजित विरोध सभा के बाद भारतीय किसान यूनियन और छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने बस्तर तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।

इस अवसर पर राजाराम तोड़ेम, दशरथ कश्यप, लखेश्वर कश्यप, अरविंद नेताम, सरपंच शकुंतला कश्यप, बबलू बघेल,जनप्रतिनिधिगण, किसान यूनियन, इंद्रावती नदी बचाओ संघर्ष समिति सहित विभिन्न किसान संगठन और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे। ज्ञापन में उद्योग पर रोक और भूमिहीन किसानों को आवंटित 16.37 हेक्टेयर जमीन खसरा नंबर 162/1 से 162/28 वापस दिलाने की मांग की गई। संगठनों का आरोप है कि कंपनी ने इस जमीन पर बिना ग्रामसभा की सहमति के कब्जा कर चारदीवारी बना दी है, जिससे पट्टाधारी किसान खेती नहीं कर पा रहे हैं। आदिवासी समाज ने इसे पांचवीं अनुसूची और पेसा कानून 1996 का उल्लंघन बताते हुए चपका को मार्कंडेय नदी तट की सांस्कृतिक धरोहर मानकर संविधान की धारा 244(1) के तहत संरक्षित करने की मांग की है। इससे पहले 1 अप्रैल को इंद्रावती नदी बचाओ संघर्ष समिति ने खाद, बीज, डीजल की किल्लत, कालाबाजारी. के विरोध में तथा धान का समर्थन मूल्य 2400 रुपए प्रति क्विंटल करने, इंटकवेल, बोधघाट परियोजना रोकने और कृषि विभाग में भर्ती जैसी 9 मांगों का ज्ञापन दिया था। किसान यूनियन ने खाद में कटौती न करने, डीजल डब्बा, जरकिन में देने और बस्तर में स्थानीय भर्ती की मांग दोहराई। आदिवासी समाज ने 2021 के कोविड केस और अप्रैल 2026 के डंडजात्रा केस वापस लेने की भी मांग रखी। सभी संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर किसानों की जमीन और आस्था का सम्मान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज होगा।