सुशासन तिहार भाजपा की नाकामी छुपाने का मंच, बुनियादी सुविधाओं के लिए भटक रही है जनता : रेखचंद जैन

0  धरातल पर चरमराई प्रशासनिक व्यवस्था 
0 पंचायतों में 16वें वित्त की राशि का नहीं हुआ आज तक भुगतान –  जैन 
0 पंचायतों से सुशासन तिहार के लिए वसूली 
जगदलपुर। पूर्व विधायक रेखचंद जैन ने प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा मनाए जा रहे ‘सुशासन तिहार’ पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जमीनी हकीकत को छुपाने और अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने के लिए भाजपा सरकार इस तरह के तड़क-भड़क वाले आयोजनों का सहारा ले रही है। पूर्व विधायक एवं संसदीय सचिव रेखचंद जैन ने कहा है कि आज धरातल पर प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है और आम जनता पानी, बिजली, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।

रेखचंद जैन ने सीधे तौर पर सरकार की वित्तीय नीतियों को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि ग्रामीण विकास की रीढ़ माने जाने वाली पंचायतों को 16वें वित्त आयोग की राशि आज तक जारी नहीं की गई है।राशि के अभाव में ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण और विकास कार्य पूरी तरह से प्रभावित हैं। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि बुनियादी काम न करा पाने के कारण जनता के प्रति जवाबदेह सरपंच और जनपद सदस्य भारी मानसिक दबाव में हैं और लगातार अपने पदों से इस्तीफे दे रहे हैं।

पूर्व विधायक रेखचंद जैन ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एक तरफ तो पंचायतों के पास विकास कार्यों के लिए फूटी कौड़ी नहीं है, वहीं दूसरी तरफ तथाकथित’सुशासन तिहार’ के भव्य आयोजनों का खर्च निकालने के लिए पंचायतों से जबरन वसूली की जा रही है। यह सुशासन नहीं बल्कि शासकीय तंत्र का घोर दुरुपयोग और भाजपा के कुशासन का जीता जागता उदाहरण है। साय सरकार को घेरते हुए पूर्व विधायक श्री जैन ने आगे कहा कि आज राजस्व विभाग से लेकर हर छोटे-बड़े सरकारी महकमे में भ्रष्टाचार का बोलबाला है। बिना लेन-देन के आम जनता का कोई भी काम नहीं हो रहा है। नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन जैसे नियमित कार्यों के लिए भी गरीब ग्रामीणों को महीनों चक्कर काटने पड़ रहे हैं।भाजपा सरकार केवल विज्ञापनों और आयोजनों में सुशासन का ढोल पीट रही है, जबकि हकीकत यह है कि जनता बुनियादी सुविधाओं के अभाव में त्रस्त है और अधिकारी, कर्मचारी बेलगाम हो चुके हैं। रेखचंद जैन ने कहा- कांग्रेस पार्टी सरकार को सख्त चेतावनी देती कि यदि जल्द ही 16वें वित्त की राशि जारी नहीं की गई और पंचायतों में विकास कार्य बहाल नहीं हुए, तो आ

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