आदिवासी समाज को प्रताड़ित कर रही भाजपा सरकार – दीपक बैज

0 भाजपा आदिवासियों को वनवासी बताकर जल, जंगल, जमीन पर से उनके अधिकार छीनना चाह रही

रायपुर। सरकार पर से आदिवासी समाज का भरोसा उठ गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि भाजपा सरकार आदिवासी समाज को प्रताड़ित कर रही है। राज्य के आदिवासी, सरकार के खिलाफ लामबंद हो रहे है। अपने जल, जंगल, जमीन और संस्कृति को बचाने के लिए बालोद में आदिवासी समाज के 10 हजार से अधिक लोग कलेक्टर कार्यालय का घेराव कर रात 11 बजे तक धरने पर बैठे रहे। पूरे प्रदेश में आदिवासी समाज सरकार की कार्यप्रणाली से आक्रोशित है। इसके पहले कवर्धा में भी आदिवासी समाज अपनी बच्चियों की सुरक्षा को लेकर कलेक्टर का घेराव कर चुके है। भाजपा के राज में सुनियोजित तरीके से आदिवासियों पर उनकी संस्कृति पर हमले हो रहे। भाजपा सरकार जल, जंगल, जमीन पर से आदिवासियों के मौलिक और नैसर्गिक अधिकार से वंचित करने का षड़यंत्र कर रही है। पेसा कानून को कमजोर किया जा रहा है, केंद्र ने वन अधिकार अधिनियम 2006 में संशोधन कर दिया है। आदिवासियों को बेदखल करने की कोशिशों का कांग्रेस विरोध करती है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि हसदेव के जंगल से लेकर तमनार के जंगल और बस्तर के बैलाडीला हाहालदी तक सरकार के मित्रों की नजर लग गयी है, जिसके कारण राज्य का आदिवासी समाज खुद को और जंगल समाप्त होने के अपनी संस्कृति को नष्ट होने का खतरा महसूस कर रहा है। इसीलिए आदिवासी समाज के लोग लामबंद हो रहे है। दुर्भाग्यजनक है कि राज्य का मुखिया आदिवासी है उसके बावजूद आदिवासी प्रताड़ित हो रहे है। संरक्षित जनजाति के लोग भी सुरक्षित नहीं है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि राज्य में जब से भाजपा की सरकार बनी है पूरे प्रदेश में यही स्थिति बनी है। अमेरा, खैरागढ़, कवर्धा, हसदेव, तमनार, बैलाडीला, हाहालदी से लेकर सभी जगह स्थानीय निवासियों की मर्जी के बिना उसको बेदखल किया जा रहा है। जल, जंगल, जमीन को हथियाकर उद्योगपतियों को सौंपा जा रहा। कांग्रेस, सरकार की इस नीति का विरोध करती है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि भाजपा आदिवासियों को वनवासी बताकर उनका मूल संस्कृति से उनको तोड़ने का काम कर रही है। आरएसएस और भाजपा आदिवासियों को उनके जंगल पर से प्राकृतिक अधिकार और पहचान छीनना चाहते है। आदिवासी समाज को वनवासी बताना भाजपा का षड़यंत्र है। आदिवासियों के उनकी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान से जुड़े विषयों पर किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह आदिवासी अस्मिता और सम्मान का मुद्दा है।

 

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