0 गुटबाजी के कारण 40 वर्षो से सुकमा में नहीं बन पाया भाजपाई विधायक
(अर्जुन झा)जगदलपुर। बस्तर संभाग के सुकमा में आयोजित पं. दीनदयाल उपाध्याय दो दिवसीय भाजपा प्रशिक्षण कार्यशाला में मुख्य रूप से उपस्थित प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय ने माना कि सुकमा में गुटबाजी के कारण 40 वर्षों में हम विधायक नहीं बना पाए हैं, इसलिए आपसी गुटबाजी छोड़कर पार्टी के लिए काम करें। प्रत्याशी कोई भी हो उसके लिए काम कर कमल खिलाने पर जोर देने की नसीहत दी।उन्होंने कार्यकर्ता को कहा कि प्रदेश के सभी जिला पंचायतों में भाजपा का अध्यक्ष है सुकमा में आपसी गुटबाजी के कारण अध्यक्ष भी नहीं बना पाए।
सुकमा में दो दिवसीय भाजपा कार्यकर्ताओं की प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश संगठन मंत्री वन साय, वन एवं पर्यावरण मंत्री केदार कश्यप एवं बस्तर सांसद महेश कश्यप उपस्थित रहे।. इन वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी के नीतियों पर प्रकाश डाला और कार्यकर्ताओं को संगठित होकर काम करने की नसीहत दी। प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि प्रशिक्षण शिविर का तात्पर्य उपस्थित दर्ज करना ही नहीं, पार्टी की नीतियों पर चलना भी है।उन्होंने कहा कि आपसी खींचतान एवं गुटबाजी के कारण 40 वर्षों में भी हम यहां अपना विधायक नहीं बना पाए हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों को नसीहत देते हुए कहा कि आपसी गुटबाजी को छोड़ संगठन को मजबूत करने के लिए काम करें। विधानसभा में प्रत्याशी चाहे वह कोई भी हो उस प्रत्याशी को जिताने एकजुटता के साथ काम करना होगा तभी सुकमा में कमल खिल पाएगा, नहीं तो हालात ऐसा ही बना रहेगा।ज्ञातव्य हो कि सुकमा में भाजपा कई गुटों में बंटी हुई है। संगठन भी इस बात को स्वीकार कर चुका है। अब देखना होगा कि संगठन से मिली नसीहत के बाद भाजपा जिला अध्यक्ष संगठन को मजबूत करने में कितना सफल होंगे या गुटबाजी को और बढ़ावा देते रहेंगे।
अधिकारी हैं गुटबाजी की जड़
सुकमा जिले में कई ऐसे अधिकारी है जो वर्षों से अंगद पांव की तरह जमे हुए हैं। ये अधिकारी कांग्रेस के लिए एजेंट की तरह कार्य करते रहे हैं। इन्ही अधिकारियों ने कांग्रेस भवन निर्माण में भी मोटी रकम सहयोग के रूप में दी है। नेताओं के चरण वंदन करते हुए वे यहां जमे हुए हैं। ऐसे अधिकारियों को हटाने भाजपा नेता संगठन एवं सरकार से कई बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन दूसरे गुट के भाजपा नेता उन्हें बचाने मंत्रियों तक दौड़ लगाकर प्रसाद चढ़ाते हैं।ऐसे अधिकारियों का जमे रहना भाजपा में गुटबाजी का कारण है। सत्ता व संगठन ऐसे अधिकारी को चिन्हांकित कर जिले से बाहर करने का अभियान चलाता है तो गुटबाजी पर भी नियंत्रण होगा और आने वाले चुनाव में भाजपा को मदद मिलेगी। संगठन ने इस पर ध्यान नहीं दिया तो सुकमा में विधायक की कुर्सी पाना सपना ही बनकर रह जाएगा।