वीर योद्धा शहीद गुंडाधुर के वंशजों ने छोड़ दी हैं आदिवासी संस्कृति और परपराएं!

०  कहां गए वो नेता, जो दावा करते थे बस्तर में एक भी धर्मांतरण न होने का

०  मतांतरित हो चुके हैं आदिवासी योद्धा गुंडाधुर के सारे वंशज 
(अर्जुन झा)जगदलपुर। जिस वीर आदिवासी योद्धा शहीद गुंडाधुर की प्रतिमा को नमन करने देश के गृहमंत्री अमित शाह मई को बस्तर आ रहे हैं, उस वीर के सारे वंशज आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को त्याग चुके हैं।ये लोग ईसाई धर्म अपना चुके हैं।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के प्रस्तावित बस्तर प्रवास को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस तैयारी का नेतानार स्थित सीआरपीएफ कैंप परिसर में नव संचालित शहीद गुंडाधुर सेवा डेरा का वन मंत्री केदार कश्यप, जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव तथा सांसद महेश कश्यप ने निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।निरीक्षण के दौरान जनप्रतिनिधियों ने नेतानार स्थित शहीद गुंडाधुर प्रतिमा स्थल एवं बेस कैंप परिसर में संचालित सेवा सेतु केंद्र का अवलोकन किया। इस सेवा डेरा के माध्यम से ग्रामीणों और महिलाओं को विभिन्न सेवाएं एवं आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। प्रतिनिधिमंडल ने आधार सेवा केंद्र, बैंक सखी केंद्र, सिलाई प्रशिक्षण केंद्र, इमली प्रोसेसिंग यूनिट तथा राइस ढेंकी की प्रोसेसिंग यूनिट का निरीक्षण कर वहां संचालित गतिविधियों की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित रखने तथा स्थानीय हितग्राहियों को अधिकाधिक लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए। इस अवसर पर सीसीएफ स्टायलो मंडावी, जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन, डीएफओ उत्तम गुप्ता, जनपद पंचायत सीईओ श्री भाटिया सहित क्षेत्र के अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

कन्वर्ट हो चुके हैं गुंडाधुर के वंशज
बस्तर के आदिवासियों के लिए यह निहायत ही दुखद बात है कि जिस आदिवासी वीर योद्धा गुंडाधुर ने आदिवासियों की अस्मिता और आदिम संस्कृति की रक्षा के लिए अंग्रेजों तथा विदेशी आक्रांताओं से लोहा लिया था, उनके ही वंशज आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को त्याग कर ईसाई धर्म अपना लिया है। जो वीर योद्धा आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और पूजा पद्धति को जिंदा रखने के लिए आजीवन लड़ता रहा, उनके ही वंशज विदेशी धर्म के आगे आश्चर्यजनक रूप से झुक गए। शहीद गुंडाधुर के नाम पर राजनीति चमकाने वाले नेता उनके परिजनों को ईसाइयत के मोहजाल में फंसने से नहीं बचा पाए। बस्तर के उन आदिवासी नेताओं की आंखों में तुष्टिकरण की ऎसी कौन से पट्टी बंधी है कि, वे विधानसभा में बड़ी दमदारी से दावा करते रहे हैं कि बस्तर में एक भी धर्मांतरण नहीं हुआ है। यह समूचे बस्तर के लिए शर्मनाक है।

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