गौधाम में सरकारी दावों की खुली पोल, अव्यवस्थाओं को लेकर हाईकोर्ट की कड़ी फटकार – सुरेंद्र वर्मा

रायपुर। गौधाम योजना को लेकर जनहित मामले में सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय बिलासपुर द्वारा सरकार को लगाई गई फटकार पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि भाजपा सरकार की गौधाम, गौ-अभ्यारण बनाने की योजना सिर्फ हवा हवाई है, सरकार के दावे केवल कागजी है, जमीनी हकीकत अलग है। बिलासपुर जिले के लाखासार गौधाम की अव्यवस्था इस सरकार के गौ माता के खिलाफ किए जा रहे अत्याचार और महापाप का प्रमाण है। हाईकोर्ट के डिवीजन बैंच का यह सवाल की “यदि व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त है तो फिर सड़कों पर आवारा पशुओं का जमावड़ा कम क्यों नहीं हो रहा है?” भाजपा की सरकार ने पूर्ववर्ती कांग्रेस की सरकार के द्वारा संचालित हजारों गोठानो को बिना वैकल्पिक व्यवस्था के बंद कर दिया, किसान खुली चराई से परेशान है, गाएं सड़कों पर बेमौत मारी जा रही है, राहगीर भी दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि भाजपा सरकार एक तरफ यह मान रही है कि प्रदेश में 1 लाख 84 हजार 993 से अधिक छुट्टा घुमन्तु गौवंश पशुधन है, जिसका कोई मालिक नही है, दूसरी ओर ढाई साल में दिखावे के लिए गिनती के गौधाम बनाकर पशुधन के संरक्षण का दावा फर्जी है। 10 हजार से ज्यादा बने बनाएं गोठानो को बंद कर ढाई साल में केवल 36 गौधाम के लिए प्रशासनिक मंजूरी मिली है, बनी केवल 3 है, एक गौधाम की क्षमता 200 पशुधन की है, ऐसे में 600 पशुधन को ही गौधाम में जगह मिला, शेष 1 लाख 84 हजार 303 पशुधन अभी भूखे प्यासे सड़क पर भटक रहे है। दुर्घटना और अवरोध का कारण का कारण बन रहे है,

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि भाजपा सरकार राजनैतिक विद्वेषवश गौ हत्या का पाप कर रही है। कांग्रेस की सरकार ने प्रदेश में 10 हजार से अधिक गोठान बनाए थे, उसमें से 7 हजार से अधिक गौठान आत्मनिर्भर थे। सरकार के पास बिना अतिरिक्त राशि खर्च किए ही गौ सेवा का अवसर था, महिला स्व सहायता समूह और गौठान समिति मिलकर उसका संचालन करती थी, गांव-गांव में पैरा दान होता था और डे केयर के रूप में वह पशुधन को संरक्षण देते थे, भाजपा की सरकार ने गोठानों में ताला लगाकर पशुधन के साथ अन्याय किया है, गौठान समिति और महिला स्व सहायता समूह से भी काम छीना है। गोठानो में तालाबंदी के चलते किसान भी खुली चराई से फसल बचाना मुश्किल हो रहा है। परेशान है दुर्घटनाएं हो रही है अभी सरकार ने सवा दो साल में पशुधन संरक्षण के लिए कोई काम नहीं किया।

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