० मोदी सरकार कर रही है युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ : मौर्य
जगदलपुर। कांग्रेस नेता सुशील मौर्य ने कहा है कि लगातार दूसरे वर्ष नीट-यूजी परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने की घटना मोदी सरकार की पूरी तरह विफलता और लापरवाही को उजागर करती है। बस्तर जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष सुशील मौर्य ने एक बयान जारी कर कहा है कि यह कोई संयोग नहीं, बल्कि सिस्टेमेटिक घोटाला है, प्रयोग है, जो भाजपा सरकार के संरक्षण में चल रहा है। सुशील मौर्य ने कहा- भूल एकबार हो सकती है, लेकिन लगातार दूसरी बार पेपर लीक होना स्पष्ट प्रमाण है कि नीट घोटाले में केंद्र सरकार की मिलीभगत है। देश के लाखों मेधावी छात्र एक साल तक रात-दिन मेहनत करते हैं। परीक्षा के बाद पेपर लीक की खबर सुनकर उनकी मेहनत और सपने दोनों चूर-चूर हो जाते हैं। इस गंभीर लापरवाही की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और एनटीए के अधिकारियों को लेनी चाहिए।
पिछली बार के दोषी को इनाम
सुशील मौर्य ने आगे आरोप लगाते हुए कहा कि 2024 में नीट पेपर लीक मामले में एनटीए के तत्कालीन महानिदेशक सुबोध कुमार सिंह को हटाया तो गया, लेकिन जैसे ही जनता का गुस्सा शांत हुआ, उन्हें स्टील मंत्रालय में एडजस्ट कर दिया गया। इसके बाद उन्हें छत्तीसगढ़ भेजा गया, जहां वे वर्तमान में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव के महत्वपूर्ण पद पर आसीन हैं। सुशीलमौर्य ने कहा- यह घटनाक्रम साफ दिखाता है कि पेपर लीक के असली गुनहगारों को भाजपा सरकार संरक्षण प्रदान करती है और उन्हें बड़े-बड़े पदों पर पुरस्कृत करती है।
छात्रों के भविष्य से सौदा
जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष सुशील मौर्य ने कहा कि भाजपा शासित राज्यों में ही बार-बार पेपर लीक की घटनाएं हो रही हैं। शिक्षा माफियाओं को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है, इसलिए वे बेखौफ होकर इस गोरखधंधे को अंजाम दे रहे हैं। भाजपा का फॉर्मूला साफ है कि जितनी बड़ी चोरी, उतना बड़ा इनाम। लेकिन इस खेल की कीमत देश के मेहनती छात्रों को चुकानी पड़ रही है। 22 लाख छात्रों को दोबारा परीक्षा की मानसिक और आर्थिक यातना झेलनी पड़ेगी। श्री मौर्य ने कहा है कि एनटीए की विश्वसनीयता पूरी तरह खत्म हो चुकी है। सुशील मौर्य ने केंद्र सरकार से मांग की है कि पेपर लीक मामले के दोषियों के खिलाफ तुरंत सीबीआई जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही दोबारा परीक्षा कराने का पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करे।