0 जगदलपुर में सजी हास परिहास और गीत संगीत की शानदार महफिल
जगदलपुर। नगर की प्रबुद्व जनता ने दंतेश्वरी मंदिर प्रांगण में देर रात तक चले हास्य कवि सम्मेलन का जमकर आनंद लिया। कवियों ने हास्य रस से हंसाया तो श्रृंगार रस की रचनाओं से झूमने पर मजबूर कर दिया।
जगत दीदी के नाम से प्रसिद्व अनिता राज के आशीर्वाद से होली के पावन अवसर पर शहर को गुदगुदाने के लिये साहित्य एवं कला समाज जगदलपुर द्वारा हास्य कवि सम्मेलन आयोजित किया गया था। महिला दिवस के अवसर पर दीदी का सम्मान किया गया। महापौर संजय पाण्डे, नगर निगम सभापति खेमसिंह देवांगन, वरिष्ठ पार्षद योगेंद्र पांडे, 360 घर अरण्यक ब्राहम्ण समाज जगदलपुर के अध्यक्ष वेदप्रकाश पाण्डे, बस्तर चेम्बर ऑफ कामर्स के वरिष्ठ उपाध्यक्ष विमल बोथरा, चिंतक एवं समाजसेवी आनंद मोहन मिश्रा,पूज्य सिंधी पंचायत जगदलपुर के अध्यक्ष
मनीष मूलचंदानी एवं जगदलपुर के पार्षदों की उपस्थिति में कवि सम्मेलन चलता रहा। कवि नरेंद्र पाढ़ी ने अपने रंगमंचीय अंदाज में वेलेंटाइन डे पर मोटी पत्नी द्वारा अपने दुबले पति को गले लगाने पर सांस रूक जाने का चित्रण कर खूब हंसाया। सुरेंद्र कुमार ने रिश्वत देना पाप है, राष्ट्र के लिए में अभिशाप है, सबको इसका ज्ञान है, राष्ट्र का किसे ध्यान है? सौ में अस्सी बेईमान है, फिर भी मेरा देश महान है। साहित्य एवं कला समाज जगदलपुर ने अपने साथ डायमंड म्यूजिकल ग्रुप को भी जोड़ा था। ग्रुप द्वारा मंच पर मधुर गीतों की सुरमयी संध्या भी आयोजित की गई। युवा कवियत्री नीता पाण्डे ने हल्बी में माता दंतेश्वरी की वंदना की। मोचो बस्तर चो लाडरी आया, मोचो बस्तर चो लाडरी आया, काय सांगेदे तुचो मया, वरदान देऊन बस्तर के दिलिस तुचो, अचरा चो छाया, ऐ मोचो दंतेसरी आया और गोटोक राजा अन्नमदेव तुचो परम भगत, राजा चो भगति के जानला सबु जगत की प्रस्तुति से बस्तर की महक बिखेरी। मंच संचालन करते हुए सनत सागर ने खूब हंसाया। योगी पर कविता सुनाकर जमकर तालियां बटोरी। उनकी पंक्तियां कुछ इस तरह रहीं- टेढ़ा मेढ़ा चलने वालों को, सीधा सीधा चलना सिखलाता है, वो कोई पोलियो का डाक्टर नहीं, मिस्टर योगी कहलाता है। किरंदुल के कवि उपेंद्र त्रिपाठी बचेली की शकुन शेंडे, गीदम के विशाल आवारा एवं महेंद्र जैन, चारामा के सुभाष जगदलपुरिया और जगदलपुर की डालेश्वरी पाण्डे, भोजराज साहू, श्रीवर सिंह ठाकुर ने भी रचनाओं का पाठ किया। यहां पर उल्लेखनीय है कि इस साल कवियों ने आपस में पैसे एकत्रित कर कवि सम्मेलन आयोजित कर साहित्य को जीवंत रखने का सराहनीय कार्य किया।