समावेशी विकास के विपरीत असमानता बढ़ाने वाला बजट- कांग्रेस

० टीसीएस कम करना प्रलोभन है, राहत नहीं, करदाता को कोई रियायत नहीं उल्टे एसटीटी, माइनिंग, स्क्रैप पर टैक्स का बोझ बढ़ा

रायपुर। केंद्रीय बजट को देश के समावेशी विकास मॉडल के विपरीत असमानता बढ़ाने वाला कदम बताते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि इस बजट से महंगाई और बेरोजगारी और बढ़ेगी। किसानों के लिए न कोई नई सिंचाई परियोजना है, न खाद सब्सिडी बढ़ाए गए और न ही कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने की कोई योजना है। कोयला कोर सेक्टर, पॉवर का मेन कंपोनेंट है, हाल ही में सरकार कोयले पर जीएसटी 5 प्रतिशत से 18 प्रतिशत बढ़ाई अब इस बजट में सेंट्रल एक्साइज कोल, माइनिंग, स्क्रैप में टैक्स बढ़ाकर दुगुना किया गया है, इससे बिजली की उत्पादन लागत बढ़ेगी जनता पर दुगुना बोझ पड़ेगा।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि आम जनता के लिए शेयर बाजार में निवेश करना अब महंगा हो जाएगा एसटीटी में कई गुना वृद्धि से फ्यूचर, ऑप्शन कारोबार महंगे हो जाएंगे। शिक्षा और चिकित्सा के लिए विदेश यात्रा पर टीसीएस में कम करना टैक्स में रियायत नहीं, जिसे यह सरकार एहसान बता कर वाहवाही लूट रही है वह मात्र प्रलोभन है, टैक्स में छूट या राहत नहीं।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि आयकर में छूट की सीमा 2014 में 2 लाख 50 हजार था, इस बजट के बाद भी 1 रुपया नहीं बढ़ा बेसिक एक्सप्शन लिमिट यथावत है। 80 सी और 80 डी की छूट में भी विगत 12 वर्षों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। पेडी, मिलेट, कनकी, चावल के निर्यात बढ़ाने के लिए कोई योजना नहीं, उल्टे कनकी के निर्यात पर रोक यथावत, चावल निर्यात पर भारी भरकम कर में कोई छूट नहीं है। 53 लाख 50 हजार करोड़ के बजट में एमएसएमई को मात्र 10 हजार करोड़ अपर्याप्त है, इसी तरह की दुर्भावनाओं के कारण ही मोदी सरकार में 90 प्रतिशत एमएसएमई 3 साल के भीतर बंद हो रहे हैं, छोटे घरेलू उद्योगों को राहत की उम्मीद थी जि आन्हें इस बजट से निराश होना पड़ा है। इस बजट में युवाओं के रोजगार की आस टूटी है, महिलाओं की बचत को कम करने वाला बजट है, किसानों को निराशा हाथ लगी है, निर्माण और निर्यात बढ़ाने के लिए कोई कार्ययोजना नहीं है, छोटे और मध्यम उद्योगों की अपेक्षा के विपरीत असमानता बढ़ाने वाला घोर निराशाजनक बजट है।

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