कांग्रेस पूरे प्रदेश में एसआईआर की निगरानी करेगी…एसआईआर का काम आयोग का दिखना चाहिए, न कि किसी दल विशेष का एजेंडा – मोहन मरकाम

० दस्तावेज जमा करने की अवधि तीन माह बढ़ाने की मांग

रायपुर। राज्य में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) को लेकर कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग से पारदर्शिता सुनिश्चित करने और प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की राजनीतिक दखलंदाजी रोकने की मांग की है। इस संबंध में कांग्रेस की एसआईआर निगरानी समिति ने आज राजीव भवन में पत्रकार वार्ता की। इसमें समिति के संयोजक मोहन मरकाम, सह-संयोजक धनेन्द्र साहू और एआईसीसी सचिव देवेन्द्र यादव उपस्थित रहे।

पूर्व मंत्री मोहन मरकाम ने कहा कि कांग्रेस की मांग है कि निर्वाचन आयोग यह सुनिश्चित करे कि एसआईआर की पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और ईमानदार तरीके से संपन्न हो। उन्होंने कहा एसआईआर का काम किसी राजनीतिक दल का एजेंडा नहीं, बल्कि आयोग की स्वतंत्र प्रक्रिया के रूप में दिखना चाहिए। बीएलओ (BLO) द्वारा घर-घर जाकर दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन अनिवार्य किया जाए और प्रत्येक मतदाता से बीएलओ के आगमन की लिखित पुष्टि ली जाए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सर्वे केवल कागजों पर न किया गया हो।

मरकाम ने यह भी कहा कि निर्वाचन आयोग मतदाता सूची का इलेक्ट्रॉनिक डेटा सभी राजनीतिक दलों को उपलब्ध कराए और किसी भी संशोधन से पहले सभी दलों के बीएलए (BLA) से चर्चा करे। उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक का नाम मतदाता सूची से काटने से पहले आयोग को यह प्रमाणित करना होगा कि वह अपात्र है। मतदाता को पर्याप्त समय दिया जाए ताकि वह अपने दस्तावेज प्रस्तुत कर सके। मरकाम ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह आयोग के कार्य में अनुचित रूप से हस्तक्षेप कर रही है एसआईआर चुनाव आयोग का काम है, तो प्रक्रिया पर सवाल उठने पर जवाब देना आयोग का दायित्व है, भाजपा का नहीं। आयोग को स्पष्ट करना चाहिए कि भाजपा किस हैसियत से एसआईआर पर सफाई दे रही है? क्या भाजपा आयोग की प्रवक्ता बन गई है?

सह-संयोजक धनेन्द्र साहू ने कहा कि दस्तावेज जमा करने और सत्यापन के लिए दी गई एक माह की अवधि पर्याप्त नहीं है। वर्तमान में प्रदेश में धान कटाई और बिक्री का समय चल रहा है। किसान इस दौरान व्यस्त रहते हैं, इसलिए दस्तावेज जमा करने की अवधि को न्यूनतम तीन माह तक बढ़ाया जाना चाहिए। एआईसीसी सचिव देवेन्द्र यादव ने कहा कि देश के कई राज्यों में भाजपा निर्वाचन आयोग के साथ मिलकर मतदाता सूचियों में हेरफेर कर रही है। बिहार में भी इसी तरह की गड़बड़ी सामने आई थी। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पूरे प्रदेश में एसआईआर की निगरानी करेगी ताकि किसी मतदाता का नाम गलत ढंग से न काटा जा सके।

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