आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं का छत्तीसगढ़भर में प्रदर्शन, ज्ञापन सौंपकर की 8 सूत्रीय मांगें

जगदलपुर। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका संयुक्त मंच–छत्तीसगढ़ के आह्वान पर प्रदेशभर में सोमवार को एक साथ सभी जिला मुख्यालयों पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं ने धरना, सभा और रैली निकालकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। मंच की प्रांतीय अध्यक्ष सरिता पाठक के नेतृत्व में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया।

आंगनबाड़ी संगठन का कहना है कि आईसीडीएस योजना लागू हुए 50 साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक कार्यकर्ता और सहायिकाओं को न तो कर्मचारी का दर्जा मिला है और न ही न्यूनतम मजदूरी, पेंशन, ग्रेच्युटी, बीमा या चिकित्सा जैसी बुनियादी सुविधाएं। वर्तमान में कार्यकर्ताओं को 4500 रुपये और सहायिकाओं को 2250 रुपये मानदेय मिलता है, जिसे संगठन ने “जीने लायक वेतन नहीं” बताया।

प्रमुख मांगें

  1. आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को तृतीय श्रेणी और सहायिका को चतुर्थ श्रेणी शासकीय कर्मचारी घोषित किया जाए।

  2. जब तक सरकारीकरण नहीं होता, तब तक पूरे देश में समान वेतन—कार्यकर्ता को ₹26,000 और सहायिका को ₹22,100 प्रतिमाह दिया जाए।

  3. सेवा निवृत्ति पर पेंशन, ग्रेच्युटी, समूह बीमा और कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिले।

  4. सहायिका को कार्यकर्ता और कार्यकर्ता को सुपरवाइजर पद पर सीधी पदोन्नति दी जाए।

  5. पोषण ट्रैकर और फेस कैप्चर जैसी डिजिटल बाध्यताओं को समाप्त कर सभी कार्य ऑफलाइन किए जाएं।

  6. महंगाई भत्ता और गुजरात उच्च न्यायालय के न्यूनतम वेतन व ग्रेच्युटी संबंधी फैसले को लागू किया जाए।

  7. सेवानिवृत्ति पर कार्यकर्ता को ₹10,000 और सहायिका को ₹8,000 मासिक पेंशन, साथ ही क्रमशः ₹5 लाख और ₹4 लाख ग्रेच्युटी दी जाए।

  8. आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में परिवार के एक सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति मिले।

संगठन ने कहा कि केंद्र और राज्य दोनों जगह भाजपा की सरकार होने के कारण अब जिम्मेदारी से बचने का कोई औचित्य नहीं है। ज्ञापन में चेतावनी दी गई कि अगर मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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