० छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल उन्मूलन नीति और नियद नेल्लानार योजना का असर
बीजापुर। छत्तीसगढ़ शासन और भारत सरकार की नक्सल उन्मूलन नीति के तहत बीजापुर जिले में चलाए जा रहे नक्सल विरोधी अभियान ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी), जिला पुलिस बल, एसटीएफ, कोबरा, और केरिपु बल के संयुक्त प्रयासों, साथ ही छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास एवं आत्मसमर्पण नीति और नियद नेल्लानार योजना से प्रभावित होकर, 30 माओवादियों ने आज आत्मसमर्पण किया। यह आत्मसमर्पण उप पुलिस महानिरीक्षक (दंतेवाड़ा रेंज) कमलोचन कश्यप, उप महानिरीक्षक (केरिपु सेक्टर, बीजापुर) बी.एस. नेगी, पुलिस अधीक्षक (बीजापुर) डॉ. जितेंद्र कुमार यादव, कमांडेंट 199 बटालियन (केरिपु) आनंद कुमार, कमांडेंट 170 बटालियन (केरिपु) सरकार राजा रमन, कमांडेंट 85 बटालियन (केरिपु) सुनील कुमार राही, कमांडेंट 202 कोबरा अमित कुमार, और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हुआ।
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों का विवरण
आत्मसमर्पण करने वाले 30 माओवादियों में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर सक्रिय सदस्य शामिल हैं, जिनमें उत्तर बस्तर डिवीजन के तहत के.के. (किसकोड़ो कुएम) सब डिवीजन ब्यूरो इंचार्ज (DVCM), कंपनी नंबर 02 के सदस्य, प्लाटून और एरिया कमेटी के सदस्य, जनताना सरकार के उपाध्यक्ष और सदस्य, मिलिशिया प्लाटून सदस्य, और DAKMS सदस्य शामिल हैं। इनमें से कई पर लाखों रुपये का इनाम था, और ये वर्षों से माओवादी गतिविधियों में सक्रिय थे।
प्रमुख आत्मसमर्पित माओवादियों में शामिल हैं:
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सोनू हेमला उर्फ कोरोटी (38 वर्ष, DVCM, के.के. सब डिवीजन ब्यूरो इंचार्ज, इनाम: 8 लाख रुपये, 2003 से सक्रिय)
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कल्लू पूनेम उर्फ रंजीत (28 वर्ष, पीपीसीएम, कंपनी नंबर 02, इनाम: 8 लाख रुपये, 2011 से सक्रिय)
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कोसी कुंजाम (28 वर्ष, पीपीसीएम, कंपनी नंबर 02, इनाम: 8 लाख रुपये, 2011 से सक्रिय)
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मोटी पूनेम उर्फ हड़मे (25 वर्ष, पार्टी सदस्य, कंपनी नंबर 02, इनाम: 8 लाख रुपये, 2013 से सक्रिय)
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पाण्डे पूनेम (25 वर्ष, पार्टी सदस्य, कंपनी नंबर 02, इनाम: 8 लाख रुपये, 2015 से सक्रिय)
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मंगली पोटाम (30 वर्ष, ACM, दक्षिण सब जोनल ब्यूरो सप्लाई टीम, इनाम: 5 लाख रुपये, 2008 से सक्रिय)
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बोटी ओयाम उर्फ लालू (40 वर्ष, ACM, इंद्रावती एरिया कमेटी, इनाम: 5 लाख रुपये, 1998 से सक्रिय)
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मंगली मोडियम (35 वर्ष, पार्टी सदस्य, भैरमगढ़ एरिया कमेटी, इनाम: 2 लाख रुपये, 2004 से सक्रिय)
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सोमड़ी अवलम (21 वर्ष, पार्टी सदस्य, प्लाटून नंबर 10, इनाम: 2 लाख रुपये, 2018 से सक्रिय)
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विमला पूनेम (23 वर्ष, पार्टी सदस्य, नेशनल एरिया कमेटी, इनाम: 2 लाख रुपये, 2016 से सक्रिय)
(अन्य आत्मसमर्पित माओवादियों की सूची में जनताना सरकार के सदस्य, मिलिशिया प्लाटून सदस्य, और DAKMS सदस्य शामिल हैं, जिनमें से कुछ पर 50,000 रुपये तक का इनाम था।)

छत्तीसगढ़ शासन की नीतियों का प्रभाव
छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल उन्मूलन नीति 2025 और नियद नेल्लानार योजना ने माओवादियों को हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने के लिए प्रेरित किया है। इस नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को आर्थिक सहायता, शिक्षा, रोजगार, और पुनर्वास की सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। इसके अतिरिक्त, नक्सल हिंसा से प्रभावित लोगों के लिए भी राहत और पुनर्वास की व्यवस्था की गई है।
बीजापुर पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र कुमार यादव ने कहा, “शासन की पुनर्वास नीति और नियद नेल्लानार योजना ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हम माओवादियों से अपील करते हैं कि वे हिंसा का मार्ग त्यागें और समाज में सम्मानजनक जीवन जीने के लिए आत्मसमर्पण करें।
आत्मसमर्पण की प्रक्रिया और भविष्य की अपील
आत्मसमर्पण की प्रक्रिया के दौरान, माओवादियों ने बताया कि वे सरकार की नीतियों और विकास योजनाओं से प्रभावित हुए हैं। कई माओवादियों ने संगठन के भीतर बढ़ते असंतोष और हिंसक गतिविधियों से तंग आकर आत्मसमर्पण का फैसला लिया। पुलिस और सुरक्षा बलों ने आत्मसमर्पित माओवादियों को प्रोत्साहन राशि प्रदान की और उनके पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
अधिकारियों ने बताया कि नक्सल विरोधी अभियानों और पुनर्वास नीतियों के कारण माओवादी संगठन कमजोर हुआ है, और भविष्य में और अधिक माओवादियों के आत्मसमर्पण की उम्मीद है। छत्तीसगढ़ शासन का लक्ष्य मार्च 2026 तक राज्य को नक्सलवाद से मुक्त करना है, और इस दिशा में यह आत्मसमर्पण एक महत्वपूर्ण कदम है।