0 मीडिया के खिलाफ अघोषित आपातकाल
जगदलपुर। युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता जावेद खान ने छत्तीसगढ़ शासन के चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश को लेकर प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लिया है और साय सरकार से पूछा है कि क्यों ऐसी जरूरत आन पड़ी कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ छत्तीसगढ़ की मीडिया पर अस्पतालों की अव्यवस्थाओं को जगजाहिर करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है? क्यों मीडिया को दबाने और बंधक बनाने ऐसा तुगलकी फरमान छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से जारी किया गया है? इस आदेश से वार्डों के निरीक्षण से लेकर मरीज और परिजनों से मीडिया संवाद पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
जावेद खान ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में जबसे भाजपा की सरकार आई है तबसे रेत माफिया, खनन माफिया ,शराब माफिया, कर्ज माफिया और भू-माफिया सक्रिय हो उठे हैं और उन्हें सरकार का संरक्षण भी मिल रहा है। अब छत्तीसगढ़ प्रदेश में मानव अंग तस्करी करने वाले माफिया भी सक्रिय हो गए हैं जिन्हें संरक्षण देने राज्य सरकार ने अस्पतालों में मीडिया के प्रवेश को वर्जित कर दिया है। ऐसा कौन सा पाप विष्णु देव साय सरकार छत्तीसगढ़ के अस्पतालों में कर रही है या करने वाली है जिसके जनता के बीच आने का डर साय सरकार को अभी से सताने लगा है। जिसे रोकने मीडिया पर प्रतिबंध सरकार को लगाना पड़ गया है। जावेद ने कहा यह शंका इसलिए भी पैदा हो रही है क्योंकि अभी कुछ दिन पूर्व ही राजधानी के मेकाहारा में पत्रकारों और माफियाओं के बीच झड़प हुई थी आखिर अस्पतालों में गुंडों के जरिए तो नहीं मानव अंग तस्करी फल-फूल रही है? जावेद ने कहा भाजपा ने चुनाव पूर्व मीडिया की आजादी का वादा था, अब कवरेज पर पाबंदी लगाई जा रही है। अस्पताल में पत्रकार अब पीआरओ से अनुमति लेकर ही रिपोर्टिंग करेंगे और जो पीआओ जारी करेगा वही छापेंगे और जो प्रबंधन दिखाना चाहेगा वही दिखाएंगे। आखिर यह कैसा तुगलकी फरमान है, सरकार को यह तानाशाही आदेश तुरंत वापस लेना चाहिए।अस्पतालों की अव्यवस्थाओं को सुधारने में पूरी तरह से विफल हो चुकी है विष्णु सरकार इसलिए अस्पतालों में मीडिया के प्रवेश पर ही विराम लगाया जा रहा है। यह छत्तीसगढ़ की निष्पक्ष पत्रकारिता को दबाने की साजिश है। छत्तीसगढ़ के निर्भीक और निष्पक्ष पत्रकारों से यह सरकार खौफजदा है। जावेद ने कहा मीडिया के लिए विभागों में लक्ष्मण रेखा खींची जा रही है जो कि मीडिया पर अघोषित आपातकाल लगाने के बराबर है। जावेद ने राज्य सरकार से मांग की है कि सरकार तत्काल इस तानाशाही आदेश को वापस ले और मीडिया को स्वतंत्र रूप से काम करने दे।