रायपुर। छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने संसद में पारित वक्फ संशोधन बिल को देश के लिए ऐतिहासिक और क्रांतिकारी फैसला बताया है। उन्होंने कहा कि यह संशोधन मुस्लिम समाज के विकास, संपत्ति प्रबंधन में पारदर्शिता, और शिक्षा व गरीबी उन्मूलन के लिए एक मजबूत आधार बनेगा।
रायपुर स्थित अपने आवास में पत्रकारों से चर्चा करते हुए श्री साव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार 2014 से ही सुधार और बदलाव की नीति पर काम कर रही है, और यह बिल उसी दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है।
9.4 लाख एकड़ जमीन का अब होगा सही प्रबंधन
डिप्टी सीएम ने बताया कि वक्फ बोर्ड के पास देश में करीब 9.4 लाख एकड़ जमीन है, जो रेलवे और सेना के बाद सबसे अधिक है। पहले इन जमीनों का सही उपयोग नहीं हो रहा था, और कुछ चुनिंदा लोग इसका फायदा उठा रहे थे। अब इस बिल के माध्यम से संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता आएगी और उन्हें सामान्य जनता की भलाई के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
वक्फ कानून की कमियों को किया गया दूर
श्री साव ने कहा कि पहले वक्फ कानून में कई खामियां थीं – सरकारी जमीन, अन्य धर्मों की संपत्ति या आदिवासी जमीन को भी वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया जाता था। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा वक्फ बोर्ड का गठन सही तरीके से नहीं किया गया था और उसमें महिलाओं को कोई प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया था। अब मोदी सरकार ने इन सभी खामियों को दूर कर दिया है।
विपक्ष पर साधा निशाना
अरुण साव ने विपक्षी दलों पर राजनीतिक भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जैसे अनुच्छेद 370, 35A, और CAA को लेकर विपक्ष ने जनता को गुमराह किया, वैसे ही अब वक्फ संशोधन को लेकर भी गलत धारणाएं फैलाई जा रही हैं। उन्होंने दो टूक कहा, “आज तक किसी मुस्लिम की नागरिकता CAA के कारण नहीं गई, विपक्ष को अब अपना झूठ साबित करके दिखाना चाहिए।”
ममता बनर्जी को भी दी नसीहत
उप मुख्यमंत्री ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि बंगाल में कानून-व्यवस्था चरमरा चुकी है और बांग्लादेशी घुसपैठिए हालात बिगाड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी जैसे नेताओं को देश की नीति पर सवाल उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
मुस्लिम समाज को दिलाया भरोसा
अरुण साव ने कहा कि मुस्लिम समाज अब तुष्टिकरण की राजनीति को समझ चुका है। यह संशोधन उनके भविष्य को सुरक्षित करने और शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास के मार्ग को प्रशस्त करने के लिए है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह बिल मुस्लिम समाज को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।