पंचायत स्तर पर बाल अधिकारों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता जरूरी : नरेंद्र पाणिग्रही

० बाल विवाह, बाल श्रम और लैंगिक शोषण रोकने सपोर्ट पर्सन नियुक्त करेगी बाल कल्याण समिति 
जगदलपुर। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष नरेंद्र पाणिग्रही ने कहा है कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा और उनके सुरक्षित भविष्य के लिए पंचायत स्तर पर जागरूकता एवं प्रभावी पहल बेहद जरूरी है। ग्राम पंचायत बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और सुरक्षा से जुड़े अधिकारों को जमीन पर लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसी उद्देश्य से बाल अधिकारों और बच्चों से संबंधित शासकीय योजनाओं की जानकारी पंचायत स्तर तक पहुंचाने की आवश्यकता है। नरेंद्र पाणिग्रही ने कहा है कि ग्राम पंचायतों द्वारा 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही शाला त्याग चुके बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने में सक्रिय भूमिका निभाई जा सकती है। इसी तरह आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों के टीकाकरण, पोषण आहार और नियमित स्वास्थ्य जांच पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
बच्चों को बाल विवाह, बाल श्रम, बाल तस्करी तथा किसी भी प्रकार के शोषण से बचाना पंचायत और समाज की प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल होना चाहिए। बाल कल्याण समिति (न्यायपीठ) जिला बस्तर ने कहा है कि नाबालिग बालक-बालिकाओं को स्कूल स्तर पर लैंगिक शोषण एवं उससे संबंधित अपराधों की जानकारी देना अत्यंत आवश्यक है। बच्चों को उनके अधिकारों के साथ-साथ यह भी बताया जाना चाहिए कि किसी भी व्यक्ति द्वारा गलत स्पर्श, अनुचित व्यवहार अथवा शोषण का प्रयास होने पर वे चुप न रहें और तत्काल किसी भरोसेमंद व्यक्ति को इसकी जानकारी दें।
समिति ने कहा कि बच्चों को सुरक्षित वातावरण देने में केवल सरकारी संस्थाओं की ही नहीं, बल्कि परिवार, पंचायत, शिक्षक और पूरे समाज की महत्वपूर्ण भूमिका है। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों से नियमित रूप से बातचीत करें, उनकी बात ध्यान से सुनें और उनके व्यवहार में अचानक आए बदलावों को गंभीरता से समझने का प्रयास करें।
बाल कल्याण समिति (न्यायपीठ) जिला बस्तर के अध्यक्ष नरेंद्र पाणिग्रही ने कहा कि बच्चों को लैंगिक शोषण से बचाने के लिए केवल घटना होने के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। हमें बच्चों को पहले से जागरूक और सक्षम बनाना होगा, ताकि वे सही और गलत व्यवहार में अंतर समझ सकें और किसी भी परेशानी की स्थिति में बिना डर के अपनी बात सामने रख सकें।
उन्होंने कहा कि हर माता-पिता को बच्चों के साथ संवाद का वातावरण बनाना चाहिए। बच्चे हमारे पास अपनी बात लेकर तभी आएंगे, जब उन्हें विश्वास होगा कि उनकी बात सुनी और समझी जाएगी। स्कूलों में भी नियमित रूप से बाल अधिकार, सुरक्षित एवं असुरक्षित स्पर्श और लैंगिक शोषण से बचाव को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। श्री पाणिग्राही ने कहा कि बाल विवाह, बाल श्रम, बाल तस्करी और लैंगिक शोषण जैसी घटनाओं को रोकना किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें बाल कल्याण समिति के साथ पंचायत प्रतिनिधि, समाज प्रमुख, शिक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, अभिभावक और आम नागरिकों को मिलकर काम करना होगा। सामूहिक जागरूकता और सतर्कता के माध्यम से हम अपने बच्चों को सुरक्षित वातावरण दे सकते हैं। उन्होंने अभिभावकों और शिक्षकों से अपील की कि यदि किसी बच्चे के साथ किसी प्रकार के शोषण अथवा लैंगिक अपराध की जानकारी मिलती है तो मामले को छिपाने के बजाय तत्काल जिला बाल संरक्षण इकाई अथवा बाल कल्याण समिति (न्याय पीठ) के समक्ष प्रस्तुत किया जाए, ताकि बच्चे को आवश्यक संरक्षण, परामर्श और कानूनी सहायता मिल सके। बाल कल्याण समिति ने बताया कि लैंगिक शोषण से प्रभावित बच्चों को संरक्षण एवं आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के साथ कानूनी कार्रवाई में सहयोग के लिए सपोर्ट पर्सन के माध्यम से पूरे प्रकरण में सहायता प्रदान की जा सकती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पीड़ित बच्चा कानूनी प्रक्रिया के दौरान अकेला महसूस न करे और उसे आवश्यक सहयोग एवं मार्गदर्शन मिलता रहे। समिति ने पंचायतों और विद्यालयों से अपील की है कि वे बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा को अपनी नियमित कार्ययोजना का हिस्सा बनाएं।