० एक साल से मुआवजे का इंतजार, अब पूरी तरह ढह गया आशियाना
० पिछले वर्ष अधिकारियों का दिया आश्वासन आज तक नहीं हुआ पूरा
(अर्जुन झा)बकावंड। यह मसला सिर्फ एक गरीब के सपने बिखरने, उसके मकान टूटने का नहीं है, बल्कि यह मसला है सिस्टम की बेरुखी, वादाखिलाफी और बेदर्दी से भी जुड़ा है। पिछले वर्ष जब मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुआ था, तब प्रशासन के अधिकारियों ने मौका मुआयना कर जल्द मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया था। साल बीतने के बाद भी मुआवजा नहीं मिला, लिहाजा मकान की मरम्मत नहीं हो सकी और इस बारिश ने लक्ष्मण को पूरी तरह बेघर कर दिया है। सिस्टम का वादा लक्ष्मण के मकान के मलबे तले दफ्न हो गया।
बकावंड विकासखंड की ग्राम पंचायत मैलबेड़ा में प्रशासनिक उदासीनता का एक गंभीर मामला सामने आया है। ग्रामीण लक्ष्मण पिता समदू का कच्चा मकान पिछले वर्ष भारी बारिश के दौरान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था। घटना के बाद राजस्व एवं प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे, निरीक्षण किया और शीघ्र मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया। लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बावजूद पीड़ित को आज तक किसी प्रकार की आर्थिक सहायता या मुआवजा नहीं मिल सका। नतीजतन क्षतिग्रस्त मकान की मरम्मत नहीं हो पाई और अब इस बारिश में लक्ष्मण का मकान पूरी तरह जमींदोज हो गया, एक गरीब बेघरबार हो गया। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार बारिश और समय पर मरम्मत नहीं हो पाने के कारण इस वर्ष लक्ष्मण का मकान पूरी तरह धराशायी हो गया। अब परिवार के सामने रहने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। उनका आरोप है कि यदि पिछले वर्ष ही मुआवजा मिल जाता, तो मकान की मरम्मत कराई जा सकती थी और आज यह स्थिति नहीं बनती।
ये हैं ग्रामीण के सवाल
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि आखिर निरीक्षण और आश्वासन का क्या लाभ, जब जरूरतमंद व्यक्ति को समय पर राहत ही न मिले। उनका कहना है कि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन इस मामले में एक साल से केवल आश्वासन ही मिला। अब ग्रामीण पूछ रहे हैं कि क्या इस बार भी अधिकारी चुप्पी साधे रहेंगे, या फिर पीड़ित परिवार को तत्काल मुआवजा और राहत उपलब्ध कराई जाएगी? प्रशासन से मांग की गई है कि मामले की तत्काल जांच कर लक्ष्मण के परिवार को नियमानुसार मुआवजा एवं आवश्यक सहायता प्रदान की जाए, ताकि प्रभावित परिवार को राहत मिल सके।