० कुछ एनजीओ को विदेश से भी फंडिंग
० धर्मांतरण में उपयोग किए जाने की चर्चा
(अर्जुन झा) जगदलपुर। विदेशों में रह रहे गुप्त शत्रु भारत को सांस्कृतिक और धार्मिक रूप से कमजोर करने में लगे हैं। इस कृत्य में उन्हें देश के भीतर सक्रिय कुछ एनजीओ मदद कर रहे हैं। ऐसे एनजीओ पर अब नकेल कसना शुरू कर दिया गया है। छत्तीसगढ़ में 5 हजार से अधिक एनजीओ सक्रिय हैं, जबकि अकेले बस्तर संभाग के सभी सात जिलों में में 345 एनजीओ कार्यरत हैं। नक्सलवाद खात्मे के बाद पुलिस इन एनजीओ की कुंडली खंगालने में जुट गई है।
बस्तर संभाग में कार्यरत एनजीओ के संचालकों से पुलिस द्वारा 22 बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई है। बस्तर संभाग में सर्वाधिक एनजीओ बस्तर जिले में संचालित हैं। बस्तर संभाग में पंजीकृत इन एनजीओ के जिलेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो बस्तर जिले में 145, बीजापुर जिले में 26, दंतेवाड़ा जिले में 42, कोंडागांव जिले में 25, नारायणपुर जिले में 31, सुकमा जिले में 09 और कांकेर जिले में 67 एनजीओ कार्यरत हैं। इस तरह पूरे बस्तर संभाग में पंजीकृत 348 नॉन गवर्नमेंट संगठन (एनजीओ) हैं। इन संगठनों की गतिविधियों, फंडिंग और कार्यप्रणाली की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। पुलिस मुख्यालय ने इस तारतम्य मैं संभाग के 7 पुलिस जिला मुख्यालयों से भी जानकारी मांगी है। आदेश के तहत पता लगाया जा रहा है कि संस्थाओं को पिछले दो वर्षों में किस स्रोत से कितना फंड मिला। उसका उपयोग किन कार्यों में हुआ और इस अवधि में कौन-कौन सी गतिविधियां उनके द्वारा संचालित की गईं। पुलिस मुख्यालय ने जिलों को 22 बिंदुओं वाला प्रपत्र भेजकर जानकारी मांगी है। जिसमें पिछले पांच वर्षों की गतिविधियों की जानकारी भी शामिल है।पुलिस द्वारा इतनी विस्तृत जानकारी पहली बार मंगाई जा रही है। सूत्रों ने यह भी बताया कि 25 से अधिक संस्थाओं को विदेशों से भी आर्थिक सहायता प्राप्त होती है। ये संस्थाएं शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, महिला एवं बाल विकास सहित 47 अलग-अलग क्षेत्रों में कार्यरत होने का दावा करती हैं। मगर पता चला है कि इन गतिविधियों की आड़ में धर्मांतरण का खेल खेला जा रहा है। हिंदू समाज को बांटने की कोशिशें की जा रही हैं। बस्तर के आदिवासियों के बीच भ्रम फैलाया जा रहा है कि वे हिंदू नहीं हैं।
इन बिंदुओं पर मांगाई जानकारी
बताया गया है कि पुलिस मुख्यालय से मिले आदेश में 22 बिंदुओं पर जानकारी मंगाई गई है। इन बिंदुओं में संस्था का नाम, पंजीयन क्रमांक व तिथि, आय के स्रोत, कार्यालय का पता, संगठन द्वारा संचालित कार्यक्रम, किस नियम या अधिनियम के तहत पंजीयन हुआ, बैंक खाता क्रमांक, पंजीयन की अवधि, एफसीआरए नंबर, पदाधिकारियों के नाम, पता, मोबाइल नंबर, ई-मेल एड्रेस, पिछले पांच वर्षों की गतिविधियों का विवरण, वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट, संगठन की वेबसाइट जानकारी, संस्था का उद्देश्य, गोपनीय रिपोर्ट, सदस्यों की संख्या, शासन की नीतियों के दुरुपयोग अथवा नक्सलियों से प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष संबंध की जानकारी। संस्था से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों को मिलने वाला अनुदान व ऑडिट की स्थिति, कार्यक्षेत्र, विदेशी फंडिंग का विवरण, शासकीय विभाग से मिले कार्य का विवरण आदि शामिल हैं।